"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 1 मई 2009

"प्यार का दीपक, हवा में तेज जलता है।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

इश्क का यह भूत, हर दिल में मचलता है।

गन्ध से अपनी सुमन, दुनिया को छलता है।


रात हो, दिन हो, उजाला या अन्धेरा हो,

पुष्प के सौन्दर्य पर, षटपद मचलता है।

गन्ध से अपनी सुमन, दुनिया को छलता है।।


जेठ की दोपहर हो या माघ की शीतल पवन,

प्रेम का सूरज हृदय से ही निकलता है।

गन्ध से अपनी सुमन, दुनिया को छलता है।।


रास्ते होगें अलग, पर मंजिलें तो एक हैं,

लक्ष्य पाने को बशर राहो पे चलता है।

गन्ध से अपनी सुमन, दुनिया को छलता है।।


आँधियाँ हरगिज बुझा सकती नही नन्हा दिया,

प्यार का दीपक, हवा में तेज जलता है।

गन्ध से अपनी सुमन, दुनिया को छलता है।।

5 टिप्‍पणियां:

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails