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रविवार, 24 मई 2009

आशा का दीप जलाया क्यों? (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


आज मेरे एक मित्र ने मुझे फोन करके मेरी आज की पोस्ट के बारे में कहा-
‘‘शास्त्री जी! आप इतना अच्छा लिखते हैं, आपकी यह पोस्ट स्तरीय नही है।’’
बस उन्हीं के अनुरोध पर उसी तर्ज पर यह गीत रचा है,
आशा है कि उन्हें पसन्द आ जायेगा।

मन के सूने से मन्दिर में, आशा का दीप जलाया क्यों?

वीराने जैसे उपवन में, सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?


प्यार, प्यार है पाप नही है, इसका कोई माप नही है,

यह तो है वरदान ईश का, यह कोई अभिशाप नही है,

दो नयनों के प्यालों में, सागर सा नीर बहाया क्यों?

वीराने जैसे उपवन में, सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?


मुस्काओ स्वर भर कर गाओ, नगमों को और तरानों को,

गुंजायमान करदो फिर से, इन खाली पड़े ठिकानों को,

शीशे से भी नाजुक दिल मे, गम का अम्बार समाया क्यों?

वीराने जैसे उपवन में, सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?


स्वप्न सलोने जो छाये हैं, उनको आज धरातल दे दो,

पीत पड़े प्यारे पादप को, गंगा का निर्मल जल दे दो,

रस्म-रिवाजों के कचरे से, यह घर-द्वार सजाया क्यों?

वीराने जैसे उपवन में, सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों?

16 टिप्‍पणियां:

  1. aasha ka daman kabhi nhi chodna chaiye........aashaon par hi to duniya kayam hai..........sundar rachna.

    जवाब देंहटाएं
  2. आशा-दीप जलाया है -
    दे सकूँ तुम्हें लौ की रौनक!
    सुंदर सुमन खिलाया है -
    दे सकूँ तुम्हें ख़शबू-सौरभ!

    अब गाओ गीत सलोने तुम,
    मेरे मन में बस जाओ तुम!

    जवाब देंहटाएं
  3. आशाओं के दीप जलने बहुत
    जरूरी होते हैं इन्हें कभी बुझने न दें.

    जवाब देंहटाएं
  4. इट सीम्स दैट
    द मैटर इज ऑफ पासवर्ड!

    अदरवाइज इट इज इंपॉसिब्ल!

    एज आई थिंक
    दीज वर्ड्स आर इनफ फॉर यू!

    एम आई राँग?

    जस्ट से ट्रुथ,
    इफ यू हैव
    द रियल पॉवर ऑफ सेइँग!

    जवाब देंहटाएं
  5. is geet ki kese tareef karoon mere pas aise shabd hi nahin hain bas mujh alpagya ki badhaai svikar karen aabhaar

    जवाब देंहटाएं
  6. रवि जी।
    आपकी एंग्लो-इंडियन टिप्पणी का स्वागत है,
    अगर आप इसे अंग्रेजी लिपि मे लिखते और इसका अनुवाद हिंदी में देते तो उत्तम होता।

    जवाब देंहटाएं
  7. आपकी इस रचना में प्यार की इन्तेहाँ झलक रही है
    .सच बहुत ही दर्द और प्यार का सम्मिश्रण है .

    जवाब देंहटाएं
  8. Lajawaab shashtri ji..........

    Aaj aapse bat karke bahoot achha jaga.........aapki rachnaayen to lajawaab hoti hi hain....aaj ki rachnaa bhi aapke anuroop hi hai...

    जवाब देंहटाएं
  9. रवि जी।
    आपने अंग्रेजी को देवनागरी लिपि में लिखकर उन लोगों को एक संदेश देने का प्रयास किया है जो हिंदी को रोमन में लिखते हैं।
    आपकी युक्ति रंग लाई और श्रीमती वन्दना गुप्ता हिंदी में टिप्पणी करने लगी है।
    आपको साधुवाद और श्रीमती वन्दना गुप्ता को बधाई।
    मेरे विचार से अब विवाद का मुद्दा समाप्त हो गया है,
    परन्तु देखना यह है कि और किन-किन पर आपकी युक्ति का असर होने जा रहा है।

    जवाब देंहटाएं
  10. शास्त्री जी,
    हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के लिए
    मेरी कोशिश इसी तरह चलती रहेगी!
    इस युग में समझदार तो सभी हैं,
    पर ... ... .

    जवाब देंहटाएं
  11. भाषा विवाद और टिप्पणियों पर रवि जी द्वारा छेड़ा गया कटाक्ष निसंदेह भाषा को अपमानित करना है है. पुन:श्च भाषा अभिव्यक्ति के लिए होती है परन्तु भाषा के साथ एक सम्मान भी जुड़ा होता है. हिंदी ब्लॉग के माध्यम से हिंदी प्रेमी सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं अपितु मातृभाषा के प्रति निष्ठां भी दर्शाते हैं.

    एक सुन्दर अभिवयक्ति के लिए मयंक जी को साधुवाद वहीँ रवि जी अपने विवाद के साथ जारी रहें और हमारी हिंदी के गरीबियत का अहसास करते रहें.

    धन्यवाद.

    जवाब देंहटाएं
  12. रजनीश के झा जी अभिवादन।
    आपने बहुत सटीक लिखा है।
    आप जैसे ब्लॉगर्स की टिप्पणियों से मुझे बल मिलता है और लिखने की प्रेरणा भी।
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं

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