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शनिवार, 16 मई 2009

"नाम अलग हैं, पन्थ भिन्न हैं, पर जग में भगवान एक है।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मन्दिर, मस्जिद और गुरूद्वारे।
भक्तों को लगते हैं प्यारे।।

हिन्दू मन्दिर में हैं जाते।

देवताओं को शीश नवाते।।

ईसाई गिरजाघर जाते।

दीन-दलित को गले लगाते।।


अल्लाह का फरमान जहाँ है।
मुस्लिम का कुर-आन वहाँ है।।

जहाँ इमाम नमाज पढ़ाता।

मस्जिद उसे पुकारा जाता।।


सिक्खों को प्यारे गुरूद्वारे,
मत्था वहाँ टिकाते सारे।।

राहें सबकी अलग-अलग हैं।

पर सबके अरमान नेक है।

नाम अलग हैं, पन्थ भिन्न हैं।

पर जग में भगवान एक है।।

(सभी चित्र गूगल से साभार)

9 टिप्‍पणियां:

  1. जानकारीपरक
    और
    शैक्षिक दृष्टि से
    महत्वपूर्ण कविता!

    जवाब देंहटाएं
  2. आपको और आपकी रचना को नमन

    जवाब देंहटाएं
  3. इस चित्र मयी रचना के लिये धन्यवाद.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  4. bilkul sahi kaha........bas ye sabko samajh aani chahiye khaskar unhein jo desh ko dharm ke naam par todne ki koshish karte rahte hain........bahut hi badhiya dhang se samjhaya hai aapne.

    जवाब देंहटाएं
  5. shabash .
    prayas karte rahen aur bhi achcha likh sakenge !

    जवाब देंहटाएं
  6. शब्द रचना और चित्र दोनो ही प्रभावशाली सन्देश दे रहे हैं...

    जवाब देंहटाएं
  7. सुन्दर सन्देश देती रचना............चित्र भी खूबसूरत हैं..........

    जवाब देंहटाएं

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