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रविवार, 6 अप्रैल 2014

"मुल्क पर जानो-जिगर शैदा करो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

हौसला रख कर कदम आगे धरो।
फासले इतने तो मत पैदा करो।।

चाँद तारों से भरी इस रात में,
मत अमावस से भरी बातें करो।

जिन्दगी है बस हकीकत पर टिकी,
मत इसे जज्बात में रौंदा करो।

उलझनों का नाम ही है जिन्दगी,
हारकरथककर न यूँ बैठा करो।

छोड़ दो शिकवों-गिलों की डगर को,
मुल्क पर जानो-जिगर शैदा करो।

ज़िन्दगी है चार दिन की चाँदनी,
“रूप” पर इतना न तुम ऐंठा करो। 

6 टिप्‍पणियां:

  1. उलझनों का नाम ही है जिन्दगी,
    हारकर, थककर न यूँ बैठा करो। in do waakyon ne puri jindgi ki kahani bayaan kar di ......bahut sundar ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. छोड़ दो शिकवों-गिलों की डगर को,
    मुल्क पर जानो-जिगर शैदा करो।

    बहुत बढ़िया बात कही है

    उत्तर देंहटाएं

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