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मंगलवार, 18 नवंबर 2014

"शब्द सरिता में मेरी रचना" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

शब्द सरिता में मेरी रचना
 
हिन्दीभाषा को अपनायें।
आओ हिन्दीदिवस मनायें।।

हिन्दीवालों की हिन्दी ही-
क्यों इतनी कमजोर हो गयी?
भाषा डूबी अंधियारे में,
अंग्रेजी की भोर हो गई।
एक वर्ष में पन्द्रह दिन ही-
हिन्दी की गाथा को गायें।
आओ हिन्दीदिवस मनायें।१।

चीरहरण करते भाषा का,
ये काले अंग्रेज निरन्तर।
भेद-भाव की करतूतों से,
छेद रहे माता का अन्तर।
संविधान को धता बताकर,
ये मनमाने ढोल बजायें।
आओ हिन्दीदिवस मनायें।२।

जो जन-जन का राजदुलारा,
उसको है इण्डिया बनाया।
अपने को इण्डियन बताकर,
भारतीयता को बिसराया।
खाकर के स्वदेश का राशन,
गान विदेशों का ये गायें।
आओ हिन्दीदिवस मनायें।३।

मत माँगे हिन्दी भाषा में,
लोगों को विश्वास दिलाया।
लेकिन संसद में जाकर के,
गिटर-पिटर का सुर अपनाया।
आगामी निर्वाचन में हम,
नेताओं को धरा दिखायें।
आओ हिन्दीदिवस मनायें।४।

2 टिप्‍पणियां:

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