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रविवार, 30 नवंबर 2014

"खुलूस से कह राम और रहीम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अल्लाह निगह-ए-बान हैवो है बड़ा करीम।
जातिधरम से बाँध मतमौला को ऐ शमीम।।

बख्शी है हर बशर कोउसने इल्म की दौलत,
इन्सां को सँवारा हैदे शऊर की नेमत,
क्यों भाई  को भाई से जुदा कर रहा फईम।
जातिधरम से बाँध मतमौला को ऐ शमीम।।

कर नेक दिल सेरब की इबादत अरे बन्दे,
सच्चाई पे चलदफ्न करकाले सभी धन्धे,
बन जा जमीं का आदमी और छोड़ दे नईम।
जातिधरम से बाँध मतमौला को ऐ शमीम।।

शैतानियत की राह सेनाता तू तोड़ ले,
हुब्बे वतन की राह सेनाता तू जोड़ ले,
मिल सबसे तू खुलूस सेकह राम और रहीम।
जातिधरम से बाँध मतमौला को ऐ शमीम।।

आबाद मत फरेब करनाहक न हो बदनाम,
इन्सानियत की राह मेंमजहब का नही काम,
सबके दिलों बैठ जाबन करके तू नदीम।
जातिधरम से बाँध मतमौला को ऐ शमीम।।


1 टिप्पणी:

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