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बुधवार, 19 नवंबर 2014

"बालगीत-माता की ममता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

  • माँ को नमन करते हुए!
  • माता के उपकार बहुत,
    वो भाषा हमें बताती है!
    उँगली पकड़ हमारी माता,
    चलना हमें सिखाती है!!

    दुनिया में अस्तित्व हमारा,
    माँ के ही तो कारण है,
    खुद गीले में सोकर,
    वो सूखे में हमें सुलाती है!
    उँगली पकड़ हमारी……..

    देश-काल चाहे जो भी हो,
    माँ ममता की मूरत है,
    धोकर वो मल-मूत्र हमारा,
    पावन हमें बनाती है!
    उँगली पकड़ हमारी……..

    पुत्र कुपुत्र भले हो जायें,
    होती नही कुमाता माँ,
    अपने हिस्से की रोटी,
    बेटों को सदा खिलाती है!
    उँगली पकड़ हमारी……..

    ऋण नही कभी चुका सकता,
    कोई भी जननी माता का,
    माँ का आदर करो सदा,
    यह रचना यही सिखाती है!
    उँगली पकड़ हमारी……

6 टिप्‍पणियां:

  1. पिछले कई दिनों से इंटरनेट चल नहीं रहा है । एक पेज खुलने में एक घंटा लग जा रहा है। बीएसएनएल की जय कहने के अलावा और कोई चारा नहीं है :(

    बहुत सुंदर रचना ।

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 20-11-2014 को चर्चा मंच पर तमाचा है आदमियत के मुँह पर { चर्चा - 1803 } में दिया गया है
    आभार

    जवाब देंहटाएं
  3. एक सप्ताह बाद ब्लॉग पर आया हूँ |सरल शब्दों में माँ का महिमा गान अच्छा लगा !

    जवाब देंहटाएं
  4. ma! tujhe salam!!!! bahut pyara geet. dil ko chhu gaya

    जवाब देंहटाएं

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