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मंगलवार, 25 सितंबर 2018

दोहे "गुरुओं का ज्ञान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मतलब के हैं अब गुरू, मतलब के ही शिष्य।
दोनों इसी जुगाड़ में, कैसे बने भविष्य।।

सम्बन्धों की आज तो, हालत बड़ी विचित्र।
नहीं रहे गुरु-शिष्य अब, पावन और पवित्र।।

साथ बैठ गुरु-शिष्य जब, छलकाते हों जाम।
नवयुग की इस पौध का, क्या होगा अंजाम।।

बाजारों में बिक रहा, अब गुरुओं का ज्ञान।
हर ऊँची दूकान का, फीका है पकवान।।

दौलत के दरबार में, पैसे के हैं रंग।।
प्रतिभाएँ कुण्ठित हुई, देख अनोखे ढंग।।

9 टिप्‍पणियां:

  1. वाकई ऐसे ही गुरुओं ने गुरु शब्द को शर्मिंदा कर दिया है।

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 26 सितंबर 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!



    .

    जवाब देंहटाएं
  3. @साथ बैठ गुरु-शिष्य जब, छलकाते हों जाम। नवयुग की इस पौध का, क्या होगा अंजाम........... इस परंपरा का होगा काम तमाम !

    जवाब देंहटाएं
  4. दौलत के दरबार में, पैसे के हैं रंग।।
    प्रतिभाएँ कुण्ठित हुई, देख अनोखे ढंग।।
    शिव भक्तों की भीड़ में राहुल नंगधडंग ,
    भोले को भरमाय के पी गए सगरी भंग।
    बेहतरीन दोहावली शास्त्री जी की
    वीरूभाई
    veerusa.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  5. मतलब के हैं अब गुरू, मतलब के ही शिष्य।
    दोनों इसी जुगाड़ में, कैसे बने भविष्य।।

    सम्बन्धों की आज तो, हालत बड़ी विचित्र।
    नहीं रहे गुरु-शिष्य अब, पावन और पवित्र।।

    साथ बैठ गुरु-शिष्य जब, छलकाते हों जाम।
    नवयुग की इस पौध का, क्या होगा अंजाम।।

    बाजारों में बिक रहा, अब गुरुओं का ज्ञान।
    हर ऊँची दूकान का, फीका है पकवान।।

    दौलत के दरबार में, पैसे के हैं रंग।।
    प्रतिभाएँ कुण्ठित हुई, देख अनोखे ढंग।।
    बेहतरीन दोहावली :
    नेताओं का हो गया कैसा आज चरित्र ,
    माया ममता पूजतीं मिलके शिव का चित्र।
    veerusa.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  6. नवयुग की इस पौध का, क्या होगा अंजाम।।

    बाजारों में बिक रहा, अब गुरुओं का ज्ञान।

    उम्दा

    जवाब देंहटाएं
  7. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 27.9.18 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3107 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर सार्थक दोहे।

    जवाब देंहटाएं
  9. साथ बैठ गुरु-शिष्य जब, छलकाते हों जाम।
    नवयुग की इस पौध का, क्या होगा अंजाम।।
    बहुत सुन्दर ,सार्थक और चिन्तनीय रचना ....
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं

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