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सोमवार, 3 सितंबर 2018

रपट "स्व. टीकाराम पाण्डेय 'एकाकी' की पाँचवीं पुण्यतिथि"

मित्रों !
      कल दिनांक 2 सितम्बर, 2018 को मेरे 40 साल पुराने मित्र स्व. टीकाराम पाण्डेय 'एकाकी' की पाँचवीं पुण्यतिथि पर उनका भावपूर्ण स्मरण करते हुए काव्यमयी श्रद्धांजलि समर्पित की गयी। जिसका आयोजन उनके सुपुत्र रवीन्द्र पाण्डेय "पपीहा" ने अपने शिक्षण संस्थान "ग्लोरियस एकेडेमी" बनबसा में किया। जिसकी अध्यक्षता डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' तथा संचालन डॉ. जगदीश पन्त 'कुमुद' ने किया। 
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      पं.टीकाराम पाण्डेय के चित्र पर माल्यार्पण पुष्प समर्पण के पश्चात काव्य गोष्ठी का प्रारम्भ श्री श्रीभगवान मित्र द्वारा माँ सरस्वती की की वन्दना और एक कृष्णभक्ति का भजन प्रस्तुत किया गया।
     तत्पश्चात खटीमा निवासी श्रीमती राधा तिवारी 'राधेगोपाल' द्वारा कुछ दोहे और "वापिस घर को आना, अच्छा लगता है..." कविता का वाचन किया। नूर मुहम्मद सिकन्दरी ने "अपनी साँसों में आबाद रखना मुझे..." कलाम से नसिस्त को नवाजा। मौ. तकी अंसारी ने अपनी ग़ज़ल "मौत पर हक है, ये कहता हुआ संसार सब" को सुनाया। खटीमा से पधारे राम रतन यादव ने माता और पिता पर अपनी दो मार्मिक रचनाओं का सस्वर वाचन किया। पेशे से पत्रकार युवा कवि दीपक फुलेरा ने बेटियाँ शीर्षक से अपनी रचना का वाचन किया। खटीमा से पधारे शैलेश मटियानी रा्ज्य पुरस्कार से सम्मानित महेन्द्र प्ताप पाण्डेय 'नन्द' ने शुद्ध हिन्दी की अपनी उत्कृष्ट रचना का वाचन किया।
     इसके बाद आयोजक रवीन्द्र 'पपीहा' ने अपने स्व. पिता की जी एक रचना का पाठ किया और स्वयं की रची हुई "कोई और मुद्दा ढूँढिए अपनी सियासत के लिए" का वाचन किया। नवोदित युवा कवि नक्षत्र पाण्डेय ने "वायुयान से बादल कैसा लगता है" रचना को सुनाया। टनकपुर से पधारे पेसे से ठेकेदार कान्तिबल्लभ जोशी ने "मैं पत्थरों से लड़ रहा हूँ" रचना का पाठ किया। खटीमा से पधारे शायर एम.इलियास सिद्दीकी ने अपने अशआरों के माध्यम से स्व. टीकाराम पाण्डेय एकाकी को खिराजे अकीदत पेश किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. जगदीश पन्त 'कुमुद' ने "मेरी साँसों में बसता है, वही दिल में समाया है" का सस्वर पाठ किया। 
      कार्क्रम के अन्त में अध्यक्षता कर रहे डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने सभी कवि-शायरों की रचना की समीक्षा करते हुए गोष्ठी के समापन की घोषणा की। देखिए इस अवसर केो कुछ चित्र।














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