"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 3 सितंबर 2014

"ग़ज़ल-लुट गये हम प्यार में" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

हो रही गन्दी तिज़ारत आज तो संसार में
प्रीत की बैसाखियाँ बिकने लगीं बाज़ार में

स्वार्थ की बुनियाद पर, कैसे बने पुख़्ता भवन
आशियाने बह गये हैं आँसुओं की धार में

सभ्यता के देश में गुम हो गयी है सभ्यता
सादगी-ईमानदारी, बन्द कारागार में

हो गयी आब-ओ-हवा, खुदगर्ज़ अब तो चमन की
आबरू नीलाम होती है भरे दरबार में

समझ में आता नहीं है, शेर क्यों गीदड़ हुआ
लोमड़ी ललकारती, घुसकर हमारे द्वार में

काम थे जिनके घिनौने, पा गये वो कुर्सियाँ
अमानत में ख़यानत, करने लगे भण्डार में

“रूप” की दीवानगी में, लुट गये हम प्यार में
धमकियाँ मिलने लगीं, अब तो हमें उपहार में

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 04-09-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1726 में दिया गया है
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  2. स्वार्थ की बुनियाद पर, कैसे बने पुख़्ता भवन
    आशियाने बह गये हैं आँसुओं की धार में------

    मन को छूती यथार्थपरक गजल
    बहुत सुन्दर
    सादर

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails