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सोमवार, 29 सितंबर 2014

"तीस सितम्बर-मेरी संगिनी का जन्मदिन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

30 सितम्बर को
मेरी जीवनसंगिनी
श्रीमती अमरभारती का
60वाँ जन्मदिन है।
इस अवसर पर उपहार के रूप में
कुछ उद्गार उन्हें समर्पित कर रहा हूँ।
 
जन्मदिन पर मैं सतत् उपहार दूँगा।
प्यार जितना है हृदय में, प्यार दूँगा।।

साथ में रहते जमाना हो गया है,
“रूप” भी अब तो पुराना हो गया है,
मैं तुम्हें फिर भी नवल उद्गार दूँगा।
प्यार जितना है हृदय में, प्यार दूँगा।।

एक पथ के पथिक ही हम और तुम हैं,
एक रथ के चक्र भी हम और तुम हैं,
नाव जब भी डगमगायेगी भँवर में,
हाथ में अपनी तुम्हें पतवार दूँगा।
प्यार जितना है हृदय में, प्यार दूँगा।।

साथ तुम मझधार में मत छोड़ देना,
प्रीत की तुम डोर को मत तोड़ देना,
सुमन कलियों से सुसज्जित चमन में,
फैसले का मैं तुम्हें अधिकार दूँगा।
प्यार जितना है हृदय में, प्यार दूँगा।।

ज़िन्दग़ी में नित-नये आग़ाज़ होंगे,
दिन पुराने और नये अन्दाज़ होंगे,
प्राण तन में जब तलक मेरे रहेंगे,
मैं तुम्हें अपना सबल आधार दूँगा।
प्यार जितना है हृदय में, प्यार दूँगा।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. आदर्श जीवन में संगिनी के प्रति जैसे भाव होने चाहिए वे सभी कविता में हैं।यही भाव जीवन को सुखमय और सरस बनाते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुखद सहज सुखमय सुबास भरी कविता बहुत ही सुन्दर है

    उत्तर देंहटाएं
  3. आप दोनों और आपके सम्पूर्ण परिवार को हमारी ओर से भी ढेरों ढेरों शुभकामनाऐं ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर शब्दांजलि ! हार्दिक शुभकामनाएं !
    नवरात्रों की हार्दीक शुभकामनाएं !
    शुम्भ निशुम्भ बध -भाग 6

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ख़ूबसूरत उद्गार...हार्दिक शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बहुत बधाई जन्मदिन की !
    इतना सुन्दर भावों का उपहार जरूर उन्हें पसंद आया होगा :)
    बधाई आप दोनों को !

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही सुन्दर, आदरणीय अमर भारती जी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाऐं ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर उपहार ..
    माताश्री को जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाऐं ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत खूब !
    भाभी जी की सालगिरह मुबारक !!

    उत्तर देंहटाएं

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