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शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2015

बालकविता "देश कहाये विश्वगुरू तब" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

जो करता है अच्छे काम।
उसका ही होता है नाम।।

मर्यादा जो सदा निभाता।
उसको राम पुकारा जाता।

राम नाम है सबसे प्यारा।
निर्बल का है एक सहारा।।

सदाचार होता सुखदायक।
जिससे राम बने गणनायक।।

जस को तस व्यवहार किया।
जीवन का आधार दिया।।

जब आई सम्मुख अच्छाई।।
हुई पराजित सकल बुराई।।

करो न कुंठित प्रतिभाओं को।
करो साक्षर ललनाओं को।।

बच्चा-बच्चा राम जब।
देश कहाये विश्वगुरू तब।।

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