"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शनिवार, 17 अक्तूबर 2015

दोहे "कल-कल शब्द निनाद" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

लेखन से बढ़ कर नहीं, कोई भी आनन्द।
नियमित लेखन का कभी, काम न करना बन्द।।
--
जो लिखता है नियम से, मन के सब अनुभाव।
उसके मन में शब्द का, होता नहीं अभाव।।
--
मानव ही तो जगत में, करता प्रकट विचार।
भगवन ने इन्सान को, दी है शक्ति अपार।।
--
बहते निर्झर ही करें, कल-कल शब्द निनाद।
कर्मों से ही व्यक्ति को, रक्खा जाता याद।।
--
दौलत के मद में कभी, होना मत मग़रूर।
खुद को वाद-विवाद से, रखना हरदम दूर।।
--
चाहे कितने खाइए, ताकत के अवलेह।
अमर नहीं रहती कभी, पंच तत्व की देह।।
--
जो करता साहित्य का, सच्चे मन से काम।
दुनिया में उसका सदा, जीवित रहता नाम।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails