"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 16 अक्तूबर 2018

दोहे "विद्वानों के वाक्य" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


छन्दों का जिनको नहीं, लेशमात्र भी ज्ञान।
नहीं परोसें छन्द में, निज मन का विज्ञान।।

छन्द नहीं जो जानते, सुन लो एक सुझाव।
मुक्तछन्द में ही रचो, निज मन के अनुभाव।।

गणना अक्षर-शब्द की, होती है क्या चीज।
छन्दों की कैसे भला, होगी उन्हें तमीज।।

छेंप मिटाने के लिए, केवल करते तर्क।
ऐसे लोगों से सदा, रहना सदा सतर्क।।

घर में आकर जो नहीं, कर पाते शालाक्य।
चुरा रहे बेखौफ वो, विद्वानों के वाक्य।।

समालोचना में नहीं, चलती कोई घूस।
लेखक के तो शब्द ही, होते हैं फानूस।।

चला रहे जो माँग कर, अब तक अपना काम।
दुनिया में होता नहीं, भिखारियों का नाम।।

7 टिप्‍पणियां:


  1. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 17 अक्टूबर 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!



    .

    उत्तर देंहटाएं
  2. चला रहे जो माँग कर, अब तक अपना काम।
    दुनिया में होता नहीं, भिखारियों का नाम।।

    बढ़िया दोहावली शास्त्रीजी की :

    परिभाषित करती छंद मुक्तछंद ,
    शास्त्र बद्ध या स्वच्छंद।
    भाषण अब तक पढ़ रहे लिखवा कर श्री मान ,
    इनमें अपना कछु नहीं न कोई पहचान।
    veersa.blogspot.com
    veerujan.blogspot.com
    veerujibraj.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. सही है सर आज दौर चल पडा है छंद में लिख कर खुद को आदर्श कवि के रुप में स्थापित करने का, शिक्षक भी जल्द उपलब्ध हो रहे हैं, और अपक्य से छंद जगह जगह दिखाई दे रहे हैं, ना मात्रा की सही गणना ना लघु गुरु के स्थान का पता दोहा छंद तो सबसे ज्यादा लिखा जा रहा है, और प्रायः मात्राओं के ज्ञान के बिना, सच है कि इससे अच्छा अपनी अभिव्यक्ति को छंद मुक्त प्रवाह दें और सुन्दर लेखन कार्य में सहयोग करें सिखना गलत नही है पर परिपक्वता आये बिना आधा सही आधा गलत लिख कर खुद को और सामान्य जानकारी रखने वालों को धोखा तो न दें।
    सर आपकी अभिव्यक्ति की सदा कायल रही हूं और ये तो एक अहम और वैचारिक मुद्दा है।
    एक बहुत ही विचारशील रचना।
    दोहा छंद में, सादर।

    उत्तर देंहटाएं
  4. जी गुरु जी शब्द शब्द सत्य ! हमारे जैसे अनाडी नये कलमकारों के लिए एक पाठशाला और कड़ा सबक | हार्दिक आभार और नमन |

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails