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बुधवार, 24 अक्तूबर 2018

गीत "चीनी लड़ियाँ-झालर घर में कभी न लायें हम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

इस दीवाली पर माटी के,
आओ दीप जलायें हम।
चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
घर में कभी न लायें हम।।

आओ स्वच्छता के नारे को,
दुनिया में साकार करें।
नहीं विदेशी सामानों को,
जीवन में स्वीकार करें।
छोड़ साज-संगीत विदेशी,
अपने साज बजायें हम।
चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
घर में कभी न लायें हम।।

कंकरीट की खेती से,
धरती को हमें बचाना है।
खेतों में श्रम करके हमको,
गेहूँ-धान उगाना है।
अपने खेतों की मेढ़ों पर,
आओ वृक्ष लगायें हम।
चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
घर में कभी न लायें हम।।

मजहब के ठेकेदारों की
बन्द दुकानें अब कर दो।
भारत में भाईचारे की,
चलो भावना को भर दो।
लालन-पालन करने वाली,
माँ की महिमा गायें हम।
चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
घर में कभी न लायें हम।।

असली घर में नकली पौधों
काअब कोई काम न हो।
कुटिया में महलों में अपने
कहीं छलकते जाम न हो।
बन्द करो मय-खाने, अब ये
शासन को चेतायें हम।
चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
घर में कभी न लायें हम।।

देव संस्कति को अपनाओ,
दानवता से मुँह मोड़ो।
 राम और रहमान एक हैं
मानवता को मत छोड़ो।
भेद-भावअलगाववाद का,
वातावरण मिटायें हम।
चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
घर में कभी न लायें हम।।

दीपमालिका पर दीपों से,
जगमग कुटिया-भवन करें।
मुसलिम पढ़ें नमाज और
सब हिन्दु मिलकर हवन करें।
घर-आँगन को स्वच्छ करें,
पावन परिवेश बनायें हम।।
चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
घर में कभी न लायें हम।।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 25.10.18 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3135 में दिया जाएगा

    हार्दिक धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  2. स्वच्छता अभियान से लेकर पर्यावरण चेतना तक परपंरागत ऑर्गेनिक फार्मिग से स्वदेशी के आवाहन और कड़वी चीनी से छिटकने फुलझड़ियाँ छोड़ने दहकाने वाले चीनी लोगों और उनके दुनियाभर में पसरे फैले सामान से आगाह करती रचना सबरीमाला जैसी प्रायोजित कलह के आलोक में शास्त्रीजी की रचना समसामयिक सन्दर्भों का अतिक्रमण करती हुई बहुत आगे तक मार करती है। पढ़िए आप भी :
    इस दीवाली पर माटी के,
    आओ दीप जलायें हम।
    चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
    घर में कभी न लायें हम।।

    आओ स्वच्छता के नारे को,
    दुनिया में साकार करें।
    नहीं विदेशी सामानों को,
    जीवन में स्वीकार करें।
    छोड़ साज-संगीत विदेशी,
    अपने साज बजायें हम।
    चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
    घर में कभी न लायें हम।।

    कंकरीट की खेती से,
    धरती को हमें बचाना है।
    खेतों में श्रम करके हमको,
    गेहूँ-धान उगाना है।
    अपने खेतों की मेढ़ों पर,
    आओ वृक्ष लगायें हम।
    चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
    घर में कभी न लायें हम।।

    मजहब के ठेकेदारों की
    बन्द दुकानें अब कर दो।
    भारत में भाईचारे की,
    चलो भावना को भर दो।
    लालन-पालन करने वाली,
    माँ की महिमा गायें हम।
    चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
    घर में कभी न लायें हम।।

    असली घर में नकली पौधों
    का, अब कोई काम न हो।
    कुटिया में महलों में अपने
    कहीं छलकते जाम न हो।
    बन्द करो मय-खाने, अब ये
    शासन को चेतायें हम।
    चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
    घर में कभी न लायें हम।।

    देव संस्कति को अपनाओ,
    दानवता से मुँह मोड़ो।
    राम और रहमान एक हैं
    मानवता को मत छोड़ो।
    भेद-भाव, अलगाववाद का,
    वातावरण मिटायें हम।
    चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
    घर में कभी न लायें हम।।

    दीपमालिका पर दीपों से,
    जगमग कुटिया-भवन करें।
    मुसलिम पढ़ें नमाज और
    सब हिन्दु मिलकर हवन करें।
    घर-आँगन को स्वच्छ करें,
    पावन परिवेश बनायें हम।।
    चीनी लड़ियाँ-झालर अपने,
    घर में कभी न लायें हम।।
    veerujianand.blogspot.com
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    veerujichiththa.blogspot.com

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