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गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

दोहे "बहुत बड़ा नुकसान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

लिया नामवर सिंह ने, अब पूरा अवकाश।
सूना-सूना लग रहा, हिन्दी का आकाश।।

ईश्वर ने दी थी जिन्हें, सच्ची-वाचिक शक्ति।
कलमकार थे नामवर, बहुत विलक्षण व्यक्ति।।

किया नामवर सिंह ने, हिन्दी पर उपकार।
सारे जग में कर दिया, हिन्दी को गुलजार।।

पंचतत्व में मिल गया, हिन्दी का अब लाल।
हिन्दी की आलोचना, अब हो गयी निढाल।।

भाषा के जब भीष्म को, उड़ा ले गया काल।
आलोचक का हो गया, तब से बहुत अकाल।।

काव्य-गगन के सूर्य का, भाषा से अवसान।
देवनागरी का हुआ, बहुत बड़ा नुकसान।।

शब्दों के श्रद्धा-सुमन, और हृदय के भाव।
करूँ समर्पित नामवर, मैं अपने अनुभाव।।



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