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रविवार, 3 फ़रवरी 2019

गीत "प्रीत की सौगात लेकर, जन्मदिन फिर आज आया"


आ रहा मधुमास फिर से, साज मौसम ने बजाया।
प्रीत की सौगात लेकर, जन्मदिन फिर आज आया।।

साल बीता, माह बीते, बीतते दिन-पल गये,
बालपन-यौवन समय के साथ सारे ढल गये,
फिर दरकते पत्थरों ने, ज़िन्दग़ी का गीत गाया।
प्रीत की सौगात लेकर, जन्मदिन फिर आज आया।।

धार के विपरीत ही चलता रहा हूँ मैं हमेशा,
वक्त की रफ्तार को छलता रहा हूँ मैं हमेशा,
प्रतिकूल को अनुकूल करके, पथ अलग मैंने बनाया।
प्रीत की सौगात लेकर, जन्मदिन फिर आज आया।।

गान कर भँवरे रिझाते हैं हमेशा ही सुमन को,
सीख ली है देखकर मैंने परिन्दों की लगन को,
बीन कर तृण-पात मैंने, नीड़ सपनों का बनाया।
प्रीत की सौगात लेकर, जन्मदिन फिर आज आया।।

लोग मेरे जन्मदिन पर, रस्म की करते अदायी,
कम हुआ है साल पर, स्वीकार करता हूँ बधायी,
देखकर अपनत्व सबका, हर्ष है मन में समाया।
प्रीत की सौगात लेकर, जन्मदिन फिर आज आया।।

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर सृजन आदरणीय
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. गान कर भँवरे रिझाते हैं हमेशा ही सुमन को,
    सीख ली है देखकर मैंने परिन्दों की लगन को,
    बीन कर तृण-पात मैंने, नीड़ सपनों का बनाया।
    प्रीत की सौगात लेकर, जन्मदिन फिर आज आया।!!!!!!!!!!
    आदरणीय सर -- सादर प्रणाम | जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें और बधाई | सुंदर रचना आपके सुंदर , संस्कारी आत्म कथ्य के साथ आपके ऊँचे जीवन मूल्यों का दर्पण है | ऐसे ही बने रहिये और सपरिवार स्वस्थ और खुशहाल रहें - यही दुआ और कामना है |

    जवाब देंहटाएं

  3. फिर दरकते पत्थरों ने, ज़िन्दग़ी का गीत गाया....
    आप इसी तरह ज़िंदगी के गीत गाते रहें, हमारी प्रेरणा बने रहें ! जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएँ और सादर प्रणाम !
    मेरी एक कविता की चंद पंक्तियाँ आपके लिए...
    आप हैं वटवृक्ष जिसकी, छाँव इक आशीष है।
    आप हैं ममता की लोरी, ज्ञान वाली सीख हैं।
    सीखते हैं आपसे हम, चाहे जितना पढ़ लिए हैं।
    थामकर उँगली चलाया, हम तभी तो चल रहे हैं !!!

    जवाब देंहटाएं

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