"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 23 अक्तूबर 2019

दोहे "आवश्यक सामान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


--
तन के हों निर्धन भले, मन रक्खो धनवान।
मन के भीतर है भरा, दुनियाभर का ज्ञान।।
--
माटी का दीपक भले, कितना रहे कुरूप।
जलकर बाती नेह की, फैला देती धूप।।
--
दीवाली पर द्वार को, कभी न करना बन्द।
झिलमिल करते दीप ही, देते हैं आनन्द।।
--
सदा स्वदेशी का करो, जीवन में उपयोग।
मत चीनी सामान का, करो कभी उपभोग।।
--
सुलभ सभी है देश में, आवश्यक सामान।
फिर क्यों लोग विदेश की, चला रहे दूकान।।
--
नहीं किसी भी क्षेत्र में, पीछे अपना देश।
फिर क्यों टुकड़े बीनने, जाते युवक विदेश।।
--
गाते गान विदेश का, खा स्वदेश का माल।
भारत-भू को कलंकित, करते आज दलाल।।
--

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 24.10.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3498 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की गरिमा बढ़ाएगी ।

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails