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सोमवार, 4 जनवरी 2021

सरस्वती वन्दना "रचनाएँ रचवाती हो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रोज-रोज सपनों में आकर
,
छवि अपनी दिखलाती हो!
शब्दों का भण्डार दिखाकर,
रचनाएँ रचवाती हो!!
--
कभी हँस पर, कभी मोर पर,
जीवन के हर एक मोड़ पर,
भटके राही का माता तुम,
पथ प्रशस्त कर जाती हो!
शब्दों का भण्डार दिखाकर,
रचनाएँ रचवाती हो!!
--
मैं हूँ मूढ़, निपट अज्ञानी,
नही जानता काव्य-कहानी,
प्रतिदिन मेरे लिए मातु तुम,
नव्य विषय को लाती हो!
शब्दों का भण्डार दिखाकर,
रचनाएँ रचवाती हो!!
--
नही जानता पूजन-वन्दन,
नही जानता हूँ आराधन,
वर्णों की माला में माता,
तुम मनके गुँथवाती हो!
शब्दों का भण्डार दिखाकर,
रचनाएँ रचवाती हो!!
 --

11 टिप्‍पणियां:

  1. माँ सरस्वती को नमन करती एक प्यारी रचना आदरणीय। ।।।। माँ की कृपासदैव बनी रहे।

    जवाब देंहटाएं
  2. नव वर्ष मंगलमय हो। सुन्दर सृजन।

    जवाब देंहटाएं
  3. माँ सरस्वती का आशीर्वाद हो तो फिर रचनाएँ तो उतर ही आती हैं

    बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  4. सादर नमस्कार ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (5-12-20) को "रचनाएँ रचवाती हो"'(चर्चा अंक-3937) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  5. माँ सरस्वती की बहुत ही सुंदर आराधना।

    जवाब देंहटाएं
  6. नही जानता पूजन-वन्दन,
    नही जानता हूँ आराधन,
    वर्णों की माला में माता,
    तुम मनके गुँथवाती हो!
    शब्दों का भण्डार दिखाकर,
    रचनाएँ रचवाती हो!!

    बहुत सुंदर...
    बहत मधुर रचना ..
    सादर नमन 🌹🙏🌹

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत ही बेहतरीन रचना आदरणीय 👌👌

    जवाब देंहटाएं
  8. ओह, कितनी सुंदर, कितनी सुमधुर वंदना लिखी है आपने...
    सचमुच आदरणीय, आपकी लेखनी में स्वयं देवी सरस्वती का वास है।
    नमन है आपकी लेखनी को 🌹🙏🌹
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर पावन स्तुति माँ वागीश्वरी की श्रृद्धा से ओतप्रोत।

    जवाब देंहटाएं
  10. वीणावादिनी के चरणों में अर्पित दिव्य रचना मुग्ध करती है - - साधुवाद, आदरणीय शास्त्री जी, नमन सह ।

    जवाब देंहटाएं

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