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रविवार, 3 मार्च 2013

"गज़ल-भरोसा कर लिया मेंने" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज एक पुरानी डायरी मिली
उसमें ये गज़ल मिल गई!
आपके साथ साझा कर रहा हूँ
बिना जाँचे-बिना परखे, भरोसा कर लिया मेंने 
खुशनुमा ज़िन्दग़ी में, काम कैसा कर लिया मैंने 

मुझे मालूम क्या था, हर अदा उसकी छलावा थीं
हसीं आग़ाज का, अन्ज़ाम कैसा कर लिया मैंने 

ज़लालत झेलकर भी, जी रहे ज़िन्दादिली से हम 
सिकन्दर नाम को गुमनाम कैसा कर लिया मैंने 

किया है प्यार तो उसको, निभायेंगे उम्रभर हम
तुम्हारी आशिकी में नाम कैसा कर लिया मैंने

दिलो-जाँ से फिदा हूँ मैं, तुम्हारे "रूप" की खातिर 
जहाँ में नाम को, बदनाम कैसा कर लिया मैंने 

20 टिप्‍पणियां:

  1. वाह आदरणीय गुरुदेव श्री वाह ऐसी शानदार लाजवाब ग़ज़ल आपने डायरी में रखी थी. ऐसी सुन्दर ग़ज़ल तो हम पाठकों के लिए है ऐसी ग़ज़ल तो ह्रदय को पुलकित एवं आनंदित करती है. लाजवाब अशआर हुए हैं सादर बधाई स्वीकारें.

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  2. आभार आदरणीय-
    बढ़िया प्रस्तुति ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही लाजबाब ग़ज़ल है मान्यवर,सादर आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  4. purani cheej bahut achchhi hoti hai aur khud bhi dekh kar lagata hai ki kya aisa hamane hi likha tha. badhiya prastuti.

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  5. pitare se nikli behatareen gazal sir,"pitari gazal ki har roj yun hi khulti rhe, bn pyar ki shahnayee gazal aapki kayamt tk hansti rahe.....(Aziz Jaunpuri)

    उत्तर देंहटाएं
  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि कल दिनांक 04-03-2013 को सोमवारीय चर्चा : चर्चामंच-1173 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  8. लाजवाब गजल! बधाई स्वीकार करें।

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  9. विवाह के पूर्व की रचना तो नहीं है?

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत खूब सुन्दर लाजबाब अभिव्यक्ति।।।।।।

    मेरी नई रचना
    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    पृथिवी (कौन सुनेगा मेरा दर्द ) ?

    ये कैसी मोहब्बत है

    उत्तर देंहटाएं
  11. आपकी रचना निर्झर टाइम्स पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें http://nirjhar-times.blogspot.com और अपने सुझाव दें।

    उत्तर देंहटाएं

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