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मोती होता आँख का, सबके लिए अमोल।
उसके लिए बहाइए, जिसके सच्चे बोल।१।
मत रोना उसके लिए, जो करता किल्लोल।
आँसू हैं उसके लिए, जो दिल को दे खोल।२।
रखना बहुत सँभाल के, ये मोती अनमोल।
सारे जग के सामने, यही खोलता पोल।३।
आँसू रहता आँख में, चेहरे पर मुस्कान।
एक दिखाता दर्द को, दूजा हरे थकान।४।
दुःख और अनुराग की, होती कथा विचित्र।
लेकिन हैं हर हाल में , ये दोनों ही मित्र।५।
सागर से कम है नहीं, आँसू का अस्तित्व। आँसू का संसार में, होता है वर्चस्व।६। |
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सुंदर, सार्थक दोहे
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर अर्थपूर्ण दोहे...
जवाब देंहटाएंRECENT POST: पिता.
bahut badhiya...
जवाब देंहटाएंआंसू पर धारदार प्रस्तुति-
जवाब देंहटाएंमुस्कान आ गई -
आभार गुरुदेव ||
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (2-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
जवाब देंहटाएंसूचनार्थ!
आदरणीय गुरू जी,
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर दोहे!
एक प्रश्न जरूर पूछना चाहूंगा कि क्या दोहे में मात्रा की छूट मान्य है। कुछ लोग इस पर आपत्ति करते हैं। मुझे मार्गदर्शन दें।
सादर!
बहुत सुंदर दोहे!
जवाब देंहटाएं~सादर!!!
बृजेश सिंह जी!
जवाब देंहटाएंदोहे में मात्र की छूट मान्य नहीं है।
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दोहा, मात्रिक अर्द्धसम छंद है। दोहे के चार चरण होते हैं। इसके
विषम चरणों (प्रथम तथा तृतीय) में १३-१३ मात्राएँ और सम चरणों
(द्वितीय तथा चतुर्थ) में ११-११ मात्राएँ होती हैं। विषम चरणों के आदि
में जगण ( । ऽ । ) नहीं होना चाहिए। सम चरणों के अंत में एक गुरु
और एक लघु मात्रा का होना आवश्यक होता है अर्थात अन्त में लघु
होता है।
प्रभावशाली रचना सदैव की भांति ....मंगल कमाना सर !
जवाब देंहटाएंAansuon ke shabdo ko bhasha ,bhav avm arth deti damdar prastuti
जवाब देंहटाएंबेहतरीन।
जवाब देंहटाएंसभी दोहे एक से बढकर एक
जवाब देंहटाएंरखना बहुत सँभाल के, ये मोती अनमोल।
सारे जग के सामने, यही खोलता पोल।३।
बहुत सुंदर
आदरणीय शास्त्री जी बहुत सुंदर संदेश परक दोहे सभी एक से बढ़कर एक हैं
जवाब देंहटाएंआँसू रहता आँख में, चेहरे पर मुस्कान।
एक दिखाता दर्द को, दूजा हरे थकान।४।
ये दोहा तो बहुत ही अधिक पसंद आया हार्दिक बधाई आपको
बहुत नायब होते हैं, अश्कों के ये मोती
जवाब देंहटाएंयूँही इस दौलत को लुटाया नाही करते .... बहुत सुन्दर रचना शास्त्री जी!
अति उत्तम गुरु जी आँसू दोहे
जवाब देंहटाएंअश्रु बहे तो विश्व सहे।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर
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