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शुक्रवार, 1 मार्च 2013

"आँसू-कुछ दोहे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मोती होता आँख का, सबके लिए अमोल।
उसके लिए बहाइए, जिसके सच्चे बोल।१।

मत रोना उसके लिए, जो करता किल्लोल।
आँसू हैं उसके लिए, जो दिल को दे खोल।२।
    
रखना बहुत सँभाल के, ये मोती अनमोल।
सारे जग के सामने, यही खोलता पोल।३।

आँसू रहता आँख में, चेहरे पर मुस्कान।
एक दिखाता दर्द को, दूजा हरे थकान।४।

दुःख और अनुराग की, होती कथा विचित्र।
लेकिन हैं हर हाल में , ये दोनों ही मित्र।५।

सागर से कम है नहीं, आँसू का अस्तित्व।
आँसू का संसार में, होता है वर्चस्व।६।

18 टिप्‍पणियां:

  1. आंसू पर धारदार प्रस्तुति-
    मुस्कान आ गई -
    आभार गुरुदेव ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (2-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  3. आदरणीय गुरू जी,
    बहुत सुन्दर दोहे!
    एक प्रश्न जरूर पूछना चाहूंगा कि क्या दोहे में मात्रा की छूट मान्य है। कुछ लोग इस पर आपत्ति करते हैं। मुझे मार्गदर्शन दें।
    सादर!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बृजेश सिंह जी!
    दोहे में मात्र की छूट मान्य नहीं है।
    --
    दोहा, मात्रिक अर्द्धसम छंद है। दोहे के चार चरण होते हैं। इसके
    विषम चरणों (प्रथम तथा तृतीय) में १३-१३ मात्राएँ और सम चरणों
    (द्वितीय तथा चतुर्थ) में ११-११ मात्राएँ होती हैं। विषम चरणों के आदि
    में जगण ( । ऽ । ) नहीं होना चाहिए। सम चरणों के अंत में एक गुरु
    और एक लघु मात्रा का होना आवश्यक होता है अर्थात अन्त में लघु
    होता है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्रभावशाली रचना सदैव की भांति ....मंगल कमाना सर !

    उत्तर देंहटाएं
  6. Aansuon ke shabdo ko bhasha ,bhav avm arth deti damdar prastuti

    उत्तर देंहटाएं
  7. सभी दोहे एक से बढकर एक

    रखना बहुत सँभाल के, ये मोती अनमोल।
    सारे जग के सामने, यही खोलता पोल।३।

    बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  8. आदरणीय शास्त्री जी बहुत सुंदर संदेश परक दोहे सभी एक से बढ़कर एक हैं
    आँसू रहता आँख में, चेहरे पर मुस्कान।
    एक दिखाता दर्द को, दूजा हरे थकान।४।
    ये दोहा तो बहुत ही अधिक पसंद आया हार्दिक बधाई आपको

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत नायब होते हैं, अश्कों के ये मोती
    यूँही इस दौलत को लुटाया नाही करते .... बहुत सुन्दर रचना शास्त्री जी!

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है ......
    सादर , आपकी बहतरीन प्रस्तुती

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    पृथिवी (कौन सुनेगा मेरा दर्द ) ?

    ये कैसी मोहब्बत है

    उत्तर देंहटाएं

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