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शनिवार, 2 मार्च 2013

"वीराना चमन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

खो गये जाने कहाँ सारे सुमन।
हो गया है आज वीराना चमन।।

आज क्यों बंजर हुई अपनी धरा,
लील ली किसने यहाँ की उर्वरा,
अब यहाँ कैसे उगायें धान्य-धन।
हो गया है आज वीराना चमन।।

आज गंगा भी विषैली हो गयी,
पतित-पावन धार मैली हो गयी,
अब यहाँ कैसे करें हम आचमन?
हो गया है आज वीराना चमन।।

देशभक्तों का नहीं कुछ मान है,
हो रहा गद्दार का सम्मान है,
अब कहाँ से आयेगा चैनो-अमन?
हो गया है आज वीराना चमन।।

घूस देकर देश की सरकार को,
अब विदेशी आ गये व्यापार को,
हो रहा बेरोज़गारों का दमन।
हो गया है आज वीराना चमन।।

दासता का पथ नहीं अब दूर है,
दम्भ में शासक बहुत ही चूर है,
कौन माता का करेगा अब नमन?
हो गया है आज वीराना चमन।।

31 टिप्‍पणियां:

  1. देशभक्तों का नहीं कुछ मान है,
    हो रहा गद्दार का सम्मान है,
    अब कहाँ से आयेगा चैनो-अमन?
    हो गया है आज वीराना चमन।।


    क्या कहने, सही बात
    अच्छी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  2. BlogVarta.com पहला हिंदी ब्लोग्गेर्स का मंच है जो ब्लॉग एग्रेगेटर के साथ साथ हिंदी कम्युनिटी वेबसाइट भी है! आज ही सदस्य बनें और अपना ब्लॉग जोड़ें!

    धन्यवाद
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    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (02-03-2013) के चर्चा मंच 1172 पर भी होगी. सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  5. दासता का पथ नहीं अब दूर है,दम्भ में शासक बहुत ही चूर है,
    कौन माता का करेगा अब नमन?हो गया है आज वीराना चमन।।


    बहुत सही कहा है आपने !!

    उत्तर देंहटाएं
  6. देशभक्तों का नहीं कुछ मान है,
    हो रहा गद्दार का सम्मान है,

    बहुत ही सार्थक लिखे है गुरुवर,आज अपने देश में हालत ऐसे ही हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  7. वस्तुस्थिति से अवगत कराती-
    झकझोरती रचना-
    आभार गुरु जी-

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. राना जी छत पर पड़े, गढ़ में बड़े वजीर |

      नई नई तरकीब से, दे जन जन को पीर |



      दे जन जन को पीर, नीर गंगा जहरीला |

      मँहगाई *अजदहा, समूचा कुनबा लीला |



      रविकर लीला गजब, मरे कुल नानी नाना |

      बजट बिराना पेश, देखता रहा बिराना ||

      अजदहा=बड़ा अजगर
      बिराना=पराया / मुँह चिढाना

      हटाएं
  8. जब स्वयं का स्वार्थ सिद्ध करने वालों की फेहरिस्त लम्बी होती चलेगी तो ऐसे ही हालत होने है ......सार्थक प्रस्तुति ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. गीत क्या आज की बद-इंतजामिया पर सटीक टिपण्णी है यह .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

    उत्तर देंहटाएं
  10. सटीक टिप्पिनी ,देशप्रेम याद आ गया ,जो 15 अगस्त और 26 जनवरी को ही याद आता है

    उत्तर देंहटाएं
  11. jab tak badlegee nahee maansiktaa deshwaasiyon kee ,sthiti nahee badlegee ,
    aisee sarkaarein aatee jaatee rahengee,jantaa dukhdaa rotee rahegee

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है ......
    सादर , आपकी बहतरीन प्रस्तुती

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    पृथिवी (कौन सुनेगा मेरा दर्द ) ?

    ये कैसी मोहब्बत है

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत ही सार्थक और सुन्दर अभिव्यक्ति ,सादर

    उत्तर देंहटाएं
  14. आज गंगा भी विषैली हो गयी,
    पतित-पावन धार मैली हो गयी,
    अब यहाँ कैसे करें हम आचमन?
    हो गया है आज वीराना चमन।।

    ...बहुत सटीक और प्रभावी रचना...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  15. देश की परवाह किसे रह गयी आज के भारत में. गिनती के लोग बचे होंगे. सुन्दर कविता.

    उत्तर देंहटाएं
  16. देशप्रेम को उजागर करती अच्‍छी रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  17. वर्तमान परिस्थिति पर सुन्दर गीत द्वारा किया गया कटाक्ष | बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ !

    उत्तर देंहटाएं
  19. सच को उजागर करती रचना .... बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  20. आप की ये सुंदर रचना शुकरवार यानी 08-03-2013 को http://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com पर लिंक की जा रही है। हो सके तो आप भी इस हलचल में आकर हमे आशिर्वाद दें।
    सूचनार्थ।

    उत्तर देंहटाएं
  21. मेरे देश को दुर्भाग्य से मुक्ति दे दे ईश्वर।

    उत्तर देंहटाएं
  22. सत्य का दर्पन दिखाती रचना..अति सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  23. दूरदर्शिता से परिपूर्ण बहुत सुंदर लाजबाब प्रस्तुति हार्दिक बधाई आदरणीय शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं

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