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मंगलवार, 26 मार्च 2013

"देख तमाशा होली का" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

"देख तमाशा होली का"
अचानक कुछ पंक्तियाँ बन गई हैं
आप भी इनका आनन्द लीजिए!
मस्त फुहारें लेकर आया,
मौसम हँसी-ठिठोली का।
देख तमाशा होली का।।

उड़ रहे पीले-हरे गुलाल,
हुआ है धरती-अम्बर लाल,
भरे गुझिया-मठरी के थाल,
चमकते रंग-बिरंगे गाल,
गोप-गोपियाँ खेल रहे हैं,
खेला आँख-मिचौली का।
देख तमाशा होली का।।
पिचकारी बच्चों के कर में,
हुल्लड़ मचा हुआ घर-घर में,
हुलियारे हैं गली-डगर में,
प्यार बसा हर जिगर-नजर में,
चारों ओर नजारा पसरा,
फागुन की रंगोली का।
देख तमाशा होली का।।
डाली-डाली है गदराई,
बागों में छाई अमराई,
गुलशन में कलियाँ मुस्काई,
रंग-बिरंगी तितली आई,
कानों को अच्छा लगता सुर,
कोयलिया की बोली का।
देख तमाशा होली का।।
गीत प्यार का आओ गाएँ,
मीत हमारे सब बन जाएँ,
बैर-भाव को दूर भगाएँ,
मिल-जुलकर त्यौहार मनाएँ,
साथ सुहाना मिले सभी को,
होली में हमजोली का।
देख तमाशा होली का।।

7 टिप्‍पणियां:

  1. देख तमाशा होली का...कई रंग है होली के इसमें सजे..बहुत सुंदर लि‍खा है

    उत्तर देंहटाएं
  2. होली की महिमा न्यारी
    सब पर की है रंगदारी
    खट्टे मीठे रिश्तों में
    मारी रंग भरी पिचकारी
    ब्लोगरों की महिमा न्यारी …………होली की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  3. holi ki hardik shubhkamnayen,sundar geet, sir jiगीत प्यार का आओ गाएँ,
    मीत हमारे सब बन जाएँ,
    बैर-भाव को दूर भगाएँ,
    मिल-जुलकर त्यौहार मनाएँ,
    साथ सुहाना मिले सभी को,
    होली में हमजोली का।
    देख तमाशा होली का।।

    उत्तर देंहटाएं

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