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सोमवार, 11 मार्च 2013

"दुनिया में आने दो!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

माता मुझको भी तो,
अपनी दुनिया में आने दो!
सीता-सावित्री बन करके,
जग में नाम कमाने दो!

अच्छी सी बेटी बनकर मैं,
अच्छे-अच्छे काम करूँगी,
अपने भारत का दुनिया में
सबसे ऊँचा नाम करूँगी,
माता मुझको भी तो अपना,
घर-संसार सजाने दो!
माता मुझको भी तो
अपनी दुनिया में आने दो!

बेटे दारुण दुख देते हैं
फिर भी इतने प्यारे क्यों?
सुख देने वाली बेटी के
गर्दिश में हैं तारे क्यों?
माता मुझको भी तो अपना
सा अस्तित्व दिखाने दो!
माता मुझको भी तो
अपनी दुनिया में आने दो!

बेटों की चाहत में मैया!
क्यों बेटी को मार रही हो?
नारी होकर भी हे मैया!
नारी को दुत्कार रही हो,
माता मुझको भी तो अपना
जन-जीवन पनपाने दो!
माता मुझको भी तो 
अपनी दुनिया में आने दो!

18 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति सोमवारीय चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आदरणीय गुरुदेव श्री सादर प्रणाम इतनी सुन्दर रचना है की पढ़ते पढ़ते ह्रदय भर आया हार्दिक बधाई स्वीकारें.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर रचना... मन भर आया... आप की ये रचना 15-03-2013 की नई पुरानी हलचल पर लिंक की गयी है... आप भी आना इस हलचल की शोभा बढ़ाने...
    सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  4. गज़ब के उदगार संजोये हैं ……शानदार प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेटी की पुकार की मार्मिक प्रस्तुतिकरण,बहुत ही प्रभावी प्रस्तुति.

    बिन मेरे नहीं बस सकता घर संसार
    फिर क्यों गर्भ से लेकर योवन तक
    लटकती हम पर नंगी तलवार
    मेरी व्यथा पर करो विचार

    उत्तर देंहटाएं
  6. सार्थकता लिये सशक्‍त रचना ...
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत मार्मिक प्रस्तुति, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुंदर समसामायिक रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ही सार्थक और मार्मिक
    प्रस्तुति महोदय.........
    साभार.........

    उत्तर देंहटाएं
  10. सार्थक अभिव्यक्ति शास्त्री जी ...

    उत्तर देंहटाएं
  11. ARE MAO,VETIO KI VYTHA KO BHI SAMJHO,UNHE AANE DO, IS DUNIYA ME,

    उत्तर देंहटाएं

  12. दिनांक 13/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  13. बेटे दारुण दुख देते हैं
    फिर भी इतने प्यारे क्यों?
    सुख देने वाली बेटी के
    गर्दिश में हैं तारे क्यों?
    एक ज्वलंत सवाल पूछती जिसका जवाब देने को माँ क्या समाज में कोई तैयार नहीं ,
    एक बिटिया की मार्मिक पुकार,
    बहुत ही खूबसूरत रचना

    उत्तर देंहटाएं

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