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सोमवार, 4 मार्च 2013

"दोहे-पलाश के फूल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

♥ दोहा सप्तक ♥
सबके लिए बसन्त का, मौसम है अनुकूल।
फागुन में मन मोहते, ये पलाश के फूल।१।
 
अंगारा सेमल हुआ, वन में खिला पलाश।
मन के उपवन में उठी, भीनी मन्द-सुवास।२।
 
सरसों फूली खेत में, पीताम्बर को धार।
देख अनोखे रूप को, भ्रमर करे गुंजार।३।
 
कुदरत ने पहना दिये, नवपल्लव परिधान।
भक्त मन्दिरों में करें, हर-हर, बम-बम गान।४।
 
खुश हो बेरी दे रही, बेरों का उपहार।
इन बेरों में है छिपा, राम लखन का प्यार।५।
 
गेंहूँ लहराने लगे, बाली पाकर आज।
मस्ती और तरंग में, डूबा सकल समाज।६।
 
मौसम में उन्माद की, छाई हुई उमंग।
लोगों पर चढ़ने लगा, अब होली का रंग।७।

15 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर दोहावली |


    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    उत्तर देंहटाएं
  2. होली के पहले ही प्रकृति का चोला रंगने लगा है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर दोहे,चित्रों से प्रस्तुति की सुंदरता में चार चाँद लग गया है,सादर नमन.

    उत्तर देंहटाएं

  4. दिनांक 06/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेर के फल देखे बिना सालों हो गये थे... धन्यवाद चित्र और दोहों के लिये.

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुंदर चित्रों से सजी ,बासंती फाल्गुनी दोहों कि फुहार ,गुरु जी प्रणाम

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुंदर दोहावली...
    प्रकृति का मनमोहक वर्णन

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह ...वसंत और फागुन दोनों की खुशियाँ बिखेरते दोहे ...मजा आ गया
    अपने ब्लॉग पर आने का निमंत्रण दे रही हूँ ....आप आयेगीं तो मुझे ख़ुशी होगी
    http://shikhagupta83.blogspot.in/2013/03/blog-post_4.html

    उत्तर देंहटाएं
  9. बसंत का सुंदर सचित्र वर्णनं
    शास्त्री जी ,सुंदर दोहावली
    साभार..........

    उत्तर देंहटाएं

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