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सोमवार, 18 मार्च 2013

"होली भरती है हुंकार" (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आया रंगों का त्यौहार,
होली भरती है हुंकार, 
प्यार का मौसम आया।
भरी ताजगी तन और मन में,
सुन्दर सुमन खिले मधुबन मे,
कोयल करती है पुकार,
सजनी करती है मनुहार,
प्यार का मौसम आया।
घर-आँगन में-परिवेशों में,
पंडित जी के उपदेशों में,
भरी हैं फागुन की फुहार,
चल रही मस्ती भरी बयार,
प्यार का मौसम आया।
गेहूँ पर यौवन है छाया,
आम-नीम-जामुन बौराया,
छाई बागों में बहार,
आओ जी भर करलें प्यार,
प्यार का मौसम आया।

9 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुंदर!
    प्रकृति पर भी जैसे छिटके होली के रंग...
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. गरम, धंदा, मीठा- तीता होली का यह गीत मुबारक !

    उत्तर देंहटाएं
  4. गरम,ठण्डा, मीठा- तीता होली का यह गीत मुबारक !
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर होली के रंग, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  6. .बहुत सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुति . आभार हाय रे .!..मोदी का दिमाग ................... .महिलाओं के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MAN

    उत्तर देंहटाएं
  7. आया रंगों का त्यौहार,
    होली भरती है हुंकार,
    प्यार का मौसम आया।

    बहुत सुन्दर फागुनी भावाभिव्यक्ति....

    उत्तर देंहटाएं

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