"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 20 मार्च 2013

"कैसे बचे यहाँ गौरय्या?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
आज विश्व गौरय्या दिवस है!

खेतों में विष भरा हुआ है,
ज़हरीले हैं ताल-तलय्या।
दाना-दुनका खाने वाली,
कैसे बचे यहाँ गौरय्या?

अन्न उगाने के लालच में,
ज़हर भरी हम खाद लगाते,
खाकर जहरीले भोजन को,
रोगों को हम पास बुलाते,
घटती जाती हैं दुनिया में,
अपनी ये प्यारी गौरय्या।
दाना-दुनका खाने वाली,
कैसे बचे यहाँ गौरय्या??

चिड़िया का तो छोटा तन है,
छोटे तन में छोटा मन है,
विष को नहीं पचा पाती है,
इसीलिए तो मर जाती है,
सुबह जगाने वाली जग को,
अपनी ये प्यारी गौरय्या।।
दाना-दुनका खाने वाली,
कैसे बचे यहाँ गौरय्या??

गिद्धों के अस्तित्व लुप्त हैं,
चिड़ियाएँ भी अब विलुप्त हैं,
खुशियों में मातम पसरा है,
अपनी बंजर हुई धरा है,
नहीं दिखाई देती हमको,
अपनी ये प्यारी गौरय्या।।
दाना-दुनका खाने वाली,
कैसे बचे यहाँ गौरय्या??

20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी रचना....
    गहन भाव लिए...
    नन्ही सी चिरैया आखिर बचे भी तो कैसे???

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढ़िया है गुरु जी-
    मेरे क्वार्टर पर तो पक्षियों की कलरव रूकती ही नहीं-
    बड़े मजे से रहते हैं तरह तरह के जीव-
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  3. आहा बेहद सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय गुरुदेव श्री वाह आनंद आ गया हार्दिक बधाई स्वीकारें

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर कविता है. मैं खुश हूं, कि मेरे आंगन में अभी भी गौरैया आती हैं, दाना चुगने.

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सार्थक पर्यावरण सचेत रचना .गौरैया की अपचयन दर (मेटाबोलिज्म )बहुत ज्यादा होती है प्रदूषण की मार सबसे पहले इसी पे पड़ ती है यह घरौंदा छोड़ भाग जाती है .

    उत्तर देंहटाएं
  6. sir ji,vastav me vilupt hoti gayrayeeye chinta ka vishy hai,mere ghar me sir ji,abhi in gaurayeeon ki gungunaht jari hai,der hone par jagati bhi hai dane ke liye

    उत्तर देंहटाएं
  7. विश्व गौरैया दिवस पर सारगर्भित रचना........

    उत्तर देंहटाएं
  8. छोटी सी गौरेया के दुःख से रूबरू कराती शानदार प्रेरक रचना !!
    आभार आदरणीय !!

    उत्तर देंहटाएं
  9. प्यारी नन्ही गौरैया की चहक सदा बनी रहे .....

    उत्तर देंहटाएं
  10. भारत में तो बहुत बड़ा खतरा आने वाला है पर्यावरण के दोहन के कारण.

    उत्तर देंहटाएं
  11. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  12. नन्ही सी गौरैया का नन्हा सा दुःख..लेकिन इसका हर्जाना मानव को ही भुगतना होगा..

    उत्तर देंहटाएं
  13. विषाक्त हवा विषाक्त भोजन ना जाने किस किस को निग्लेंगे जिनके संग खेलते अपना बचपन बीता वो गोरैय्या कहाँ है अब ,बहुत मार्मिक लिखा है आपने बधाई इस सार्थक लेखन हेतु|

    उत्तर देंहटाएं
  14. jab usaki laathi chalegi tab Gouraiyya ke liye dikhave kaa kaanun banaane waale giddh bhi nasht ho jaayenge
    Sundar bhav liye man ko chhuti rachana ... JAY HO !

    उत्तर देंहटाएं
  15. वाकई..गौरैयों को बचाना बेहद आवश्‍यक है..बहुत सुंदर कवि‍ता

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails