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शनिवार, 10 मई 2014

"मेरी माता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


चाट-चाट कर सहलाती है।
करती जाती प्यारी बातें।
खुश होकर करती है अम्मा,
मुझसे कितनी सारी बातें।।
बहुत चाव से दूध पिलाती,
बिन मेरे वो रह नहीं पाती,
सीधी सच्ची मेरी माता,
सबसे अच्छी मेरी माता,
ममता से वो मुझे बुलाती,
करती सबसे न्यारी बातें।
खुश होकर करती है अम्मा,
मुझसे कितनी सारी बातें।।
दुनियादारी के सारे गुर,
मेरी माता मुझे बताती,
हरी घास और भूसा-तिनका,
खाना-खाना भी बतलाती,
जीवन यापन करने वाली,
सिखलाती गुणकारी बातें।
खुश होकर करती है अम्मा,
मुझसे कितनी सारी बातें।।

4 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन यापन करने वाली,
    सिखलाती गुणकारी बातें।
    खुश होकर करती है अम्मा,
    मुझसे कितनी सारी बातें।।
    आदरणीय शास्त्री जी बहुत प्यारी रचना .कोई भी माँ हो माँ का प्रेम तो अनमोल है ....बधाई

    भ्रमर ५

    उत्तर देंहटाएं

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