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शुक्रवार, 16 मई 2014

"प्यार करता है संसार सारा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

धरा है तुम्हारी, गगन है तुम्हारा! 
तुम्हें प्यार करता है, संसार सारा!! 


तुम्हारी चमक से चमकता है सूरज, 
तुम्हारी दमक से दमकता है चन्दा। 
तुम्ही दे रहे हो निबल को सहारा! 
तुम्हें प्यार करता है, संसार सारा!! 


तुम्हारी चहक से मचलता पवन है, 
तुम्हारी महक से महकता सुमन है। 
तुम्हीं ने कलेवर जगत का सँवारा! 
तुम्हें प्यार करता है, संसार सारा!! 


तुम्ही हो पिता और माता तुम्ही हो, 
तुम्ही तात हो और दाता तुम्ही हो, 
प्रभो को हृदय से नमन है हमारा! 
तुम्हें प्यार करता है, संसार सारा!!

2 टिप्‍पणियां:

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