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शनिवार, 17 मई 2014

"दोहे-खिला कमल है आज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')



-१-
लोकतन्त्र के पंक में, खिला कमल है आज।
मोदी जी के शीश पर, किया सुशोभित ताज।।
-२-
दे प्रचण्ड बहुमत तुम्हें, सौंप दिया है राज।
भारतमाता की तुम्हें, रखनी होगी लाज।।
-३-
निष्कण्टक होकर करो, सबके हित में काज।
आशाओं से देखता, तुमको आज समाज।।
-४-
मँहगाई की मार से, अपना भारत ग्रस्त।
कृषक और मजदूर के, हुए हौसले पस्त।।
--
पाना होगा आपको, मँहगाई से पार।
करना होगा तन्त्र में, अब तो बहुत सुधार।।
-५-
भरा विदेशी बैंक में, अपना द्रव्य अपार।
सबसे पहले लाइए, उसको अपने द्वार।।
-६-
रिश्वतखोरी बन्द हो, मिटे भ्रष्ट आचार।
दागी को सरकार में, मत देना अधिकार।।
-७-
कम्पनियों पर तेल की, कसो कठोर लगाम।
ईंधन को सस्ता करो, घटा तेल के दाम।।
-८-
जनमानस ने प्यार से, बाँधी तुम पर आस।
मोदी तुम मत तोड़ना, जनता का विश्वास।।

6 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    आप ने लिखा...
    मैंने भी पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पड़ें...
    इस लिये आप की ये रचना...
    19/05/2013 को http://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com
    पर लिंक गयी है...
    आप भी इस हलचल में अवश्य शामिल होना...

    उत्तर देंहटाएं
  2. जनमानस ने प्यार से, बाँधी तुम पर आस।
    मोदी तुम मत तोड़ना, जनता का विश्वास।।
    सच आसभरी एक नयी सुबह हुयी है
    बहुत सुन्दर
    शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  3. अति सुन्दर...खूबसूरत...

    उत्तर देंहटाएं
  4. आशाओं से देखता तुमको आज समाज। बिल्कुल सही।
    मोदी जी को इन आशाओं पर खरा उतरना होगा।

    उत्तर देंहटाएं

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