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रविवार, 25 मई 2014

"प्रभू को प्रणाम" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों।
सबसे पहले प्रभू को प्रणाम।
मेरी श्रीमती जी का ट्यूमर का ऑपरेशन सफल हुआ है।
आप सभी मित्रों का हार्दिक धन्यवाद और आभार।
आपने मेरी जीवन संगिनी के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त कीं।
उसका ही परिणाम है कि अब वो खतरे से बाहर हैं।
--
सुप्रभात।
आप सभी का दिन मंगलमय हो।
सूर्यदेवता आपके जीवन पथ को आलोकित करें।
गुस्सा-प्यार और मनुहार
आँखें कर देतीं इज़हार 

नफरत-चाहत की भाषा का
आँखों में संचित भण्डार

बिन काग़ज़ के, बिना क़लम के
लिख देतीं सारे उद्गार

नहीं छिपाये छिपता सुख-दुख
करलो चाहे यत्न हजार

पावस लगती रात अमावस
हो जातीं जब आँखें चार

नहीं जोत जिनकी आँखों में
उनका है सूना संसार

“रूप” इन्हीं से जीवन का है
आँखें कुदरत का उपहार


8 टिप्‍पणियां:

  1. आदरेया जी के स्वास्थ्य लाभ के लिए हार्दिक मंगल कामनाएँ। बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति।

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  2. बढ़िया रचना व लेखन , आदरणीय को धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  3. गुरुवर सेवा में लगे, गुरुमाता बीमार।
    परेशान हम सब सगे, शुभकामना अपार ।

    शुभकामना अपार, निरोगी होवे काया।
    शल्यक्रिया हो सफल, दूर दुष्टों का साया ।

    सुखी होय संसार, निवेदन करता रविकर ।
    ईश्वर का आभार, रहें खुश माता-गुरुवर ॥

    उत्तर देंहटाएं
  4. यह सुखद समाचार है कि आप की पत्नी का सफल आपरेशन हो गया । मेरी बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति सोमवारीय चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. नहीं जोत जिनकी आँखों में
    उनका है सूना संसार
    “रूप” इन्हीं से जीवन का है
    आँखें कुदरत का उपहार
    .. बहुत सुन्दर मनुहार
    यूँ ही सुखी रहे घर-संसार

    उत्तर देंहटाएं

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