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बुधवार, 7 मई 2014

"गीत-आशा है..." (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

प्रियतम जब तुम आओगे,
तो संग बहारें लाओगे।
स्नेहिल रस बरसाओगे और
रंग फुहारें लाओगे।।

तुमको पाकर मन के उपवन,
बाग-बाग हो जायेंगे,
वीराने गुलशन में फिर से,
कली-सुमन मुस्कायेंगे,
जीवनरूपी बगिया में तुम,
ढंग निराले लाओगे।
स्नेहिल रस बरसाओगे और
रंग फुहारें लाओगे।।

अमराई में कोयल फिर से,
कुहुँक-कुहुँक कर गायेगी,
पेड़ों की मुर्झाई कोपलें,
फिर से गदरा जायेंगी,
अमलतास के पेड़ों पर,
वासन्ती सुमन खिलाओगे।
स्नेहिल रस बरसाओगे और
रंग फुहारें लाओगे।।

आशा है आकर तुम मेरे,
कानों में रस घोलोगे,
सदियों का तुम मौन तोड़कर,
मीठे स्वर में बोलोगे,
अपनी साँसो के सम्बल से,
मुझको तुम सहलाओगे।
स्नेहिल रस बरसाओगे और
रंग फुहारें लाओगे।।

15 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर प्राकृतिक चित्रण मन मोहक प्रेम बरसाती रचना
    भ्रमर 5

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 8-5-14 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. " कूलन में केलिन कछारन में कुञ्जन में क्यारिन में कलिन-कलिन किलकन्त है
    कहे पद्माकर परागन में पौनहुँ में पानन में पिकन पलासन पगन्त है ।
    द्वार में दिसान में दुनी में देस - देसन में देखो दीप - दीपन में दीपत दिगन्त है
    बीथिन में ब्रज में नवेलिन में बेलिन में बनन में बागन में बगरो बसन्त है ॥"
    पद्माकर

    उत्तर देंहटाएं
  5. कल 09/05/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  6. प्रियतम का आना मानो जीवन में रंग भर जाना
    बहुत ही सुन्दर रचना
    सादर!

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपकी इस उत्कृष्ट अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (11-05-2014) को ''ये प्यार सा रिश्ता'' (चर्चा मंच 1609) पर भी होगी
    --
    आप ज़रूर इस ब्लॉग पे नज़र डालें
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ही सुन्दर गीत...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  9. इन्तजार भी कैसी बेचैनी भर देता है और प्रकृति का तो बिलकुल अलग सुन्दर गीत हेतु आभार

    उत्तर देंहटाएं

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