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सोमवार, 2 जून 2014

"प्यार का अन्दाज़ कहना चाहते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)



आज दिल की बात कहना चाहते हैं 
प्यार का अन्दाज़ कहना चाहते हैं

कब तलक तुमसे छिपायें असलियत 
कल नहीं हम आज कहना चाहते हैं

सोचकर रिश्ते बनाना अज़नबी से 
राज़ हम हमराज़ कहना चाहते हैं

मधुर सुर सजता सदा आघात से 
दर्द का हम साज़ कहना चाहते हैं

इश्क करना है नहीं इतना सरल 
बिन उड़े परवाज कहना चाहते हैं 

आशिको-माशूक से ही शायरी है
हम इसे सरताज कहना चाहते हैं

सुनके जिसको “रूप” शरमाने लगे

वो दबे अल्फाज़ कहना चाहते हैं

1 टिप्पणी:

  1. जीवन के कई रंगों को समेटे मन को छूती हुई गजल
    प्रभावपूर्ण और सुन्दर
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सादर----

    आग्रह है---- जेठ मास में--------

    उत्तर देंहटाएं

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