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मंगलवार, 19 अगस्त 2014

"दोहे-मन हो रहा अशान्त" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

छन्दमुक्त आलेख तो, कहलाता है गद्य।
छन्दशास्त्र में जो बँधी, वो तुकबन्दी पद्य।‍१।

लिख करके आलेख को, अनुच्छेद में बाँट।
इसको कविता नाम दे, ज्ञान रहे हैं छाँट।२।

दूषण इतना हो गया, दूषित हुआ समीर।
कथित काव्य के रचयिता, मैला करते नीर।३।

लोग छापने के लिए, माँग रहे अतुकान्त।
देख दुर्दशा काव्य की, मन हो रहा अशान्त।४।

निकल गयी जब आत्मा, तब निष्प्राण शरीर।
ऐसी ही अब बेतुकी, शब्दों की तसबीर।५।

पथ हमको दिखला गये, तुलसी-सूर-कबीर।
लोग काव्य के पाँव में, बाँध रहे जंजीर।६।

जो दिल से निकले वही, वो है कविता मित्र।
ठोंक-पीटकर गढ़ रहे, शब्दों के क्यों चित्र।७।

करना हो तो कीजिए, ऐसा शब्द निवेश।
रोचकता के साथ में, हो जिसमें सन्देश।८।

गति-यति और विराम से, मुक्त हुआ साहित्य।
इसी लिए तो काव्य से, मिटा आज लालित्य।९।

कविता में मिलता नहीं, नैसर्गिक आनन्द।
सी.डी.-टी.वी. ने किये, भजन-कीर्तन बन्द।१०।

तुलसी-सूर-कबीर की, मीठी-मीठी तान।
निर्गुण-सगुण उपासना, भूल गया इन्सान।११।

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज बुधवारीय चर्चा मंच पर ।। आइये जरूर-

    उत्तर देंहटाएं
  2. जो दिल से निकले वही, वो है कविता मित्र।
    ठोंक-पीटकर गढ़ रहे, शब्दों के क्यों चित्र।७।
    करना हो तो कीजिए, ऐसा शब्द निवेश।
    रोचकता के साथ में, हो जिसमें सन्देश।८
    ,.,,.. बहुत सही मेरा भी यही मानना है जो दिल से निकले और उसमें सार्थक सन्देश हो, जो दिल को छू जाय वही काव्य है ..
    बहुत बढ़िया सार्थक चिंतन के साथ सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  3. ह्रदय के रक्त से भावनाओं की बेल को सींचना ही कविता है | कविता ह्रदय की स्वर लहरी है मस्तिष्क की उत्पत्ति नहीं |

    उत्तर देंहटाएं
  4. करना हो तो कीजिए, ऐसा शब्द निवेश।
    रोचकता के साथ में, हो जिसमें सन्देश।८।

    पथ हमको दिखला गये, तुलसी-सूर-कबीर।
    लोग काव्य के पाँव में, बाँध रहे जंजीर।६।

    सुन्दर दोहावली शाश्त्री जी की।

    उत्तर देंहटाएं

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