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शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

"जय-जय-जय गणपति महाराजा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे द्वारा रचित इस गणेश वन्दना में
गणेशजी के अनेक नामों में से उनके 12 नाम प्रमुख नामों (सुमुख, एकदंत,कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु,गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन) का उल्लेख है-
जय-जय-जय गणपति महाराजा।
पूरण करो सकल तुम काजा।।

सुमुख, गजानन, सिद्धिविनायक,
हे लम्बोदर, विघ्नविनाशक,
सबसे पहले आदिदेव का,
पूजन करता सकल समाजा।
जय-जय-जय गणपति महाराजा।
पूरण करो सकल तुम काजा।।

तुम हो उद्घाटक-उद्घोषक,
धूमकेतू जग के हो पोषक,
द्वैमातुर, हेरम्ब, विधाता,
एकदन्त आनन में साजा।
जय-जय-जय गणपति महाराजा।
पूरण करो सकल तुम काजा।।

दीन-दुखी के जो रखवारे,
दो सुत रहते साथ तिहारे,
पड़ें तुम्हारे चरण जहाँ पर
वहाँ-वहाँ शुभ-लाभ विराजा।
जय-जय-जय गणपति महाराजा।
पूरण करो सकल तुम काजा।।

मोदक तुमको सबसे प्यारा,
“रूप” तुम्हारा सबसे न्यारा,
भालचन्द्र का वाहन मूषक,
रिद्धि-सिद्धि के हो अधिराजा।
जय-जय-जय गणपति महाराजा।
पूरण करो सकल तुम काजा।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. गणपति सब मंगल करें ।
    सुंदर वंदन ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. गणेश चतुर्थी पर सुंदर प्रार्थना...

    उत्तर देंहटाएं
  3. गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर गणपति-प्रार्थना.
    विघ्न-विनाशक--उन्न्ति के पथ की सभी बाधाएं मिटाये.
    सभी के दुखों को काटें---मानव की सर्वोपरि उन्नति हो--कामना के साथ आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  5. जय-जय-जय गणपति महाराजा।
    पूरण करो सकल तुम काजा।।.. विध्न हरता प्रथम देव को प्रणाम .. बहुत आनंददायी प्राथना बधाई सर

    उत्तर देंहटाएं

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