"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 6 अगस्त 2014

"दोहे-फैले धवल उजास" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 
निहित ज्ञान का पुंज हैगीता में श्रीमान।
पढ़ना इसको ध्यान सेइसमें है विज्ञान।१।

कर्म बनाता भाग्य कोयह जीवन-आधार।
कर्तव्यों के साथ मेंमिल जाता अधिकार।२।

प्राणिमात्र कल्याण कावेदों में सन्देश।
जीवन में धारण करोये अनुपम उपदेश।३।

करना है हमको सदाईश्वर पर विश्वास।
अन्धकार को चीर केफैले धवल उजास।४।

अपने प्यारे देश काआओ रक्खें मान।
जगद्गुरू बनकर पुनःदुनिया को दें ज्ञान।५।

केवल कर्म प्रधान हैजीवन का आधार।
बैठे-ठाले कभी भीमिले नहीं उपहार।६।

चन्दासूरज-धरा भीचलते हैं दिन-रात।
जो देते जड़-जगत कोशीतल-सुखद प्रभात।७।

चलना ही है जिन्दगीरुकना तो है मौत।
सूरज जग रौशन करेटिम-टिम हों खद्योत।८।

तुलसीसूर-कबीर कीमीठी-मीठी तान।
निर्गुण-सगुण उपासनाभूल गया इन्सान।९।

उपादान के मर्म कोसमझाते हूँ आज।
धर्म और सत्कर्म सेसुधरे देश-समाज।१०।

7 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 07/08/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 07-08-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1698 में दिया गया है
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. चलना ही है जिन्दगी, रुकना तो है मौत।
    सूरज जग रौशन करे, टिम-टिम हों खद्योत।८।
    अर्थपूर्ण दोहावली सर्व -कालिक सत्य लिए हुए।

    उत्तर देंहटाएं
  4. केवल कर्म प्रधान है, जीवन का आधार।
    बैठे-ठाले कभी भी, मिले नहीं उपहार।

    बेहतरीन ...

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails