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गुरुवार, 9 जनवरी 2020

विश्व हिन्दी दिवस "अब हिन्दी की धूम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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दुनिया में हिन्दीदिवस, भारत की है शान।
सारे जग में बन गयी, हिन्दी की पहचान।।
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चारों तरफ मची हुई, अब हिन्दी की धूम।
भारतवासी शान से, रहे खुशी में झूम।।
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हिन्दी है सबसे सरल, मान रहा संसार।
वैज्ञानिकता से भरा, हिन्दी का भण्डार।।
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युगों-युगों से चल रहे, काल-खण्ड औ’ कल्प।
देवनागरी का नहीं, दूजा बना विकल्प।।
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गद्य-पद्य से युक्त है, हिन्दी का साहित्य।
भाषा के परिवेश में, भरा हुआ लालित्य।।
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अपने प्यारे देश में, समझो तभी सुराज।
अपनी भाषा में करे, जब हम अपने काज।।
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हिन्दी के अस्तित्व को, जग करता मंजूर।
भारतवासी जा रहे, लेकिन इससे दूर।।
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जैसा बोला जायगा, वैसा लिक्खा जाय।
भाषाओं में दूसरी, यह गुण नजर न आय।।
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अंग्रेजी का मित्रवर, छोड़ो अब व्यामोह।
अपनी भाषा के लिए, करो न ऊहा-पोह।।
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2 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (10-01-2019 ) को "विश्व हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक - 3576) पर भी होगी

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का

    महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है 
    अनीता लागुरी "अनु"

    जवाब देंहटाएं
  2. हिन्दी के अस्तित्व को, जग करता मंजूर।
    भारतवासी जा रहे, लेकिन इससे दूर।।
    -- बहुत सही बात। अभी भी हमारे देश के कई राज्य हिन्दी से कोसों दूर हैं.

    जवाब देंहटाएं

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