"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

बुधवार, 8 जनवरी 2020

दोहे "माता का अवतार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



--
घरवाली के साथ में, घर रहता गुलजार।
जीवनसाथी के बिना, सूना है परिवार।।
--
सजनी भगिनी-बेटियाँ, रखती सबका ध्यान।
कभी न करना चाहिए, नारी का अपमान।।
--
शक्तिस्वरूपा नार है, माता का अवतार।
फिर भी सुनते हैं नहीं, इनकी लोग पुकार।।
--
नारी के सम्मान का, करें आज संकल्प।
महिलाओं का जगत में, कोई नहीं विकल्प।।
--
ममता का पर्याय है, दुनिया की हर नार।
नारी तेरे रूप को, नमन हजारों बार।।
--
नारी की महिमा करूँ, कैसे आज बखान।
कम पड़ जाते शब्द हैं, करने को गुणगान।।
--
नारायण से भी बड़ी, दुनिया में है नार।
कैसे भी हालात हों, नारी रहे उदार।।
--

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 9.1.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3575 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी ।

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

समर्थक

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails