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सोमवार, 13 जनवरी 2020

दोहे "सुधरेगा परिवेश" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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उत्तरायणी पर्व की, मची हुई है धूम।
अपने भारत देश में, लोग रहे हैं झूम।।
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सरिताओं के घाट पर, लगने लगी कतार।
गंगाजल अभिषेक को, सन्त चले हरद्वार।।
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मकर राशि का सूर्य अब, बाँटेगा सौगात।
थम जायेगा देश में, जाड़े का उत्पात।।
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पतझड़ में झड़ जायगें, सभी पुराने पात।।
पेड़ों-पौधों का नवल, हो जायेगा गात।।
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आयेगा मधुमास अब, सुधरेगा परिवेश।
गूँजेंगे परिवेश में, प्यार भरे सन्देश।।
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बढ़ जायेगा देश में, अब फिर से दिनमान।
कोयलिया वन-बाग में, फिर छेड़ेगी तान।।
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सरसों की मुस्कान में, खुशियों के संकेत।
पीताम्बर को धार कर, सरसेंगे फिर खेत।।
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