"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

गुरुवार, 1 अक्तूबर 2020

दोहे "महात्मा गांधी जी का जन्मदिन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--
बापू जी का जन्मदिन, देता है सन्देश।
रहे नहीं इस देश में, अब दूषित परिवेश।।
--
साफ-सफाई पर रहे, लोगों का जब ध्यान।
 तब होगा संसार में, अपना देश महान।।
--
नहीं पनपना चाहिए, छुआ-छूत का बीज।
सभी मनायें प्यार से, ईद-दिवाली तीज।।
--
हर दफतर में हैं टँगा, गाँधी जी का चित्र।
लेकिन फिर भी घूस का, चलता खेल विचित्र।।
--
काम न हो बिन घूस के, यह चल पड़ा रिवाज।
खेल घिनौना देखकर, शरमिन्दा है लाज।।
--
बापू जी की सीख को, भूल गये सब आज।
इसीलिए तो देश का, बिगड़ा हुआ मिजाज।।
--
बिना काम के माँगते, लोग जहाँ अधिकार।
जन्म वहाँ पर किसलिए, लेंगे अब अवतार।।
--

8 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 02-10-2020) को "पंथ होने दो अपरिचित" (चर्चा अंक-3842) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  2. सारे ही महापुरुष मानवोचित और सामाजिक न्यायपूर्ण आचरण का आदर्श प्रस्तुत करते हैं - पर विडंबना यह कि सुनने-माननेवालेों की कमी सदा ही रह जाती है.

    जवाब देंहटाएं
  3. प्रणाम शास्त्री जी, आपके दोहे हमेशा ही कम में बहुत ज्यादा कह जाते हैं...वाह

    जवाब देंहटाएं
  4. पुनः बापू को आज जीवन में उतारने की आवश्यकता आ गई है । सुंदर रचना ।

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails