"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

गुरुवार, 22 अक्तूबर 2020

Remember a poem : Christina Rossetti (अनुवादक : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

Remember a poem : Christina Rossetti
अनुवादक : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”
--
मैं जब दूर चला जाऊँगा,
मेरी याद तुम्हें आयेगी!
जब हो जाऊँगा चिरमौन,
तुम्हें यादें तड़पायेंगी!
मृत हो जायेगी यह देह,
चला जाऊँगा शान्त नगर में!
पकडकर तब तुम मेरा हाथ,
पुकारोगी मुझको स्वर में! 
नही अधूरी मंजिल से,
मैं लौट पाऊँगा!
तुमसे मैं तो दूर,
बहुत ही दूर चला जाऊँगा!
इक क्षण ऐसा भी आयेगा!
मम् अस्तित्व सिमट जायेगा!
तुम सवाँर लेना अपना कल!
नई योजना बुनना प्रतिपल!
यादें तो यादें होती है,
तब तुम यही समझना!
मुझ अदृश्य के लिए,
नही तुम कभी प्रार्थना करना!
ऐसा करते-करते इक दिन,
भूल मुझे जाओगी!
किन्तु अगर तुम याद करोगी,
दुःख बहुत पाओगी!!
Christina Rossetti
AKA Christina Georgina Rossetti
जन्म: 5 दिसम्बर, 1839  
मृत्यु: 29 दिसम्बर, 1984

9 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 23-10-2020) को "मैं जब दूर चला जाऊँगा" (चर्चा अंक- 3863 ) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  2. अतिरेक प्रेम व्यंजना हिन्दी में पहुंचाने का आभार गुरुदेव

    जवाब देंहटाएं
  3. अतिरेक प्रेम व्यंजना हिन्दी में पहुंचाने का आभार गुरुदेव

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर और भावुक कविता. बहुत सुन्दर अनुवाद.

    जवाब देंहटाएं
  5. बेहतरीन प्रस्तुति आदरणीय 🙏💐🙏

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails