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सोमवार, 19 अक्तूबर 2020

गीत "कुछ मजदूरी होगी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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महक रहा है मन का आँगन,
दबी हुई कस्तूरी होगी।
दिल की बात नहीं कह पाये,
कुछ तो बात जरूरी होगी।।
--
सूरज-चन्दा जगमग करते,
नीचे धरतीऊपर अम्बर।
आशाओं पर टिकी ज़िन्दग़ी,
अरमानों का भरा समन्दर।
कैसे जाये श्रमिक वहाँ पर,
जहाँ न कुछ मजदूरी होगी।
कुछ तो बात जरूरी होगी।।
--
प्रसारण भी ठप्प हो गया,
चिट्ठी की गति मन्द हो गयी।
लेकिन चर्चा अब भी जारी,
भले वार्ता बन्द हो गयी।
ऊहापोह भरे जीवन में,
शायद कुछ मजबूरी होगी।
कुछ तो बात जरूरी होगी।।
--
हर मुश्किल का समाधान है,
सुख-दुख का चल रहा चक्र है।
लक्ष्य दिलाने वाला पथ तो,
कभी सरल हैकभी वक्र है।
चरैवेति को भूल न जाना,
चलने से कम दूरी होगी।
कुछ तो बात जरूरी होगी।।
--
अरमानों के आसमान का,
ओर नहीं हैछोर नहीं है।
दिल से दिल को राहत होती,
प्रेम-प्रीत पर जोर नहीं है।
जितना चाहो उड़ो गगन में,
चाहत कभी न पूरी होगी।
कुछ तो बात जरूरी होगी।।
--
रूप”-रंग पर गर्व न करना,
नश्वर कायानश्वर माया।
बूढ़ा बरगद क्लान्त पथिक को,
देता हरदम शीतल छाया।
साजन के द्वारा सजनी की,
सजी माँग सिन्दूरी होगी।
कुछ तो बात जरूरी होगी।।
--

10 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं
  2. कैसे जाये श्रमिक वहाँ पर,
    जहाँ न कुछ मजदूरी होगी।
    कुछ तो बात जरूरी होगी।।

    सुन्दर।

    जवाब देंहटाएं
  3. अरमानों के आसमान का,
    ओर नहीं है, छोर नहीं है।
    दिल से दिल को राहत होती,
    प्रेम-प्रीत पर जोर नहीं है।
    जितना चाहो उड़ो गगन में,
    चाहत कभी न पूरी होगी।
    कुछ तो बात जरूरी होगी।।

    सुन्दर शिक्षाप्रद गीत...

    जवाब देंहटाएं
  4. हर बात जरूरी होगी..
    वाहः..

    वंदन.. साधुवाद

    जवाब देंहटाएं
  5. चरैवेति को भूल न जाना,
    चलने से कम दूरी होगी।
    कुछ तो बात जरूरी होगी।।

    अत्यंत प्रेरणादायक पंक्तियों हेतु साधुवाद 🙏

    जवाब देंहटाएं
  6. चरैवेति को भूल न जाना,
    चलने से कम दूरी होगी।
    कुछ तो बात जरूरी होगी।।
    बहुत सुन्दर सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
  7. आदरणीय डॉ रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" सर, नमस्ते👏! बहुत सुंदर गीत है। हर छंद उत्तम है, अनुपम हौ। ये पंक्तियाँ :
    प्रसारण भी ठप्प हो गया,
    चिट्ठी की गति मन्द हो गयी।
    लेकिन चर्चा अब भी जारी,
    भले वार्ता बन्द हो गयी। लाजवाब हैं। हार्दिक साधुवाद!--ब्रजेन्द्रनाथ

    जवाब देंहटाएं
  8. अरमानों के आसमान का,
    ओर नहीं है, छोर नहीं है।
    दिल से दिल को राहत होती,
    प्रेम-प्रीत पर जोर नहीं है।
    जितना चाहो उड़ो गगन में,
    चाहत कभी न पूरी होगी।
    कुछ तो बात जरूरी होगी।।
    --बेहतरीन गीत आदरणीय।

    जवाब देंहटाएं
  9. संक्षिप्त और सुंदर रचना गागर में सागर सुंदरम मनोहरम

    जवाब देंहटाएं

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