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शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2020

बालकविता "सेवों का मौसम आया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सेवों का मौसम आया है
IMG_2317देख-देख मन ललचाया है 
सेवों का मौसम आया है ।
कितना सुन्दर रूप तुम्हारा।
लाल रंग है प्यारा-प्यारा।। 
IMG_2314प्राची ने है एक उठाया।
खाने को है मुँह फैलाया।।
IMG_2321भइया ने दो सेव उठाये। 
दोनों हाथों में लहराये।।

प्राची कहती मत ललचाओ।
जल्दी से इनको खा जाओ।।

सेव नित्यप्रति जो खाता है।
वो ताकतवर बन जाता है।।

9 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (०३-१०-२०२०) को ''गाँधी-जयंती' चर्चा - ३८३९ पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  2. सेब बहुत ही स्वास्थ्यप्रद फल। उस पर बहुत ही सुंदर रचना।

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह - वाह - वाह... प्रणाम सर... बहुत ही सुन्दर बाल कविता बन पड़ी है... हार्दिक बधाई सर!!!

    जवाब देंहटाएं

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