"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

गुरुवार, 8 अक्तूबर 2020

ग़ज़ल "रूप की धूप ढलती जाती है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जब भी पुरवा बयार आती है
ज़िन्दगी खूब खिलखिलाती है
--
जब भी बादल फलक घिरते हैं
याद साजन की तब सताती है
--
जब भी भँवरे गुहार करते हैं
तब कली खुल के मुस्कराती है
--
सर्दियाँ शीत जब उगलतीं हैं
चाँदनी भी कहर सा ढाती है
--
ज़िन्दगीभर सफर में रहना है
मंज़िलें हाथ नहीं आती है
--
आज जो है वो कल नहीं रहता
रास्ते जिन्दगी बनाती है
--
हुस्न रहता नहीं सलामत है
'रूप' की धूप ढलती जाती है
--

11 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 09-10-2020) को "मन आज उदास है" (चर्चा अंक-3849) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  2. आज जो है वो कल नहीं रहता
    रास्ते जिन्दगी बनाती है...

    बहुत ही सार्थक रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. हुस्न रहता नहीं सलामत है
    'रूप' की धूप ढलती जाती है
    –फिर गुमान क्यों कर लेती है...

    सुन्दर-सुन्दर अशआर सभी
    नमन व साधुवाद

    जवाब देंहटाएं
  4. प्रणाम शास्त्री जी, ज़िन्दगीभर सफर में रहना है
    मंज़िलें हाथ नहीं आती है..क्या खूब ल‍िखाा है ..आपके दोहे लाजवाब होते हैं

    जवाब देंहटाएं
  5. नश्वर संसार में सब नश्वर है
    बहुत अच्छी प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  6. जिंदगी भर सफर में रहना है
    मंजिले हाथ नहीं आती

    यथार्त आदरणीय शास्त्री जी

    जवाब देंहटाएं
  7. ज़िन्दगीभर सफर में रहना है
    मंज़िलें हाथ नहीं आती है

    आज जो है वो कल नहीं रहता
    रास्ते जिन्दगी बनाती है

    बेहद शानदार शेर

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर और सार्थक ग़ज़ल।

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails