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गुरुवार, 22 अगस्त 2013

"बच्चे बचपन याद दिलाते" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सीधा-सादा, भोला-भाला।
बचपन होता बहुत निराला।।

बच्चे सच्चे और सलोने।
बच्चे होते स्वयं खिलौने।।

पल में रूठें, पल में मानें।
बच्चे बैर कभी ना ठानें।।

किलकारी से घर गुंजाते।
धमा-चौकड़ी खूब मचाते।।

टी.वी. से मन को बहलाते।
कार्टून इनके मन भाते।।

पापा जब थककर घर आते।
बच्चे खुशियों को दे जाते।।

तुतली भाषा में बतियाते।
बच्चे बचपन याद दिलाते।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. सच कहा आपने, बच्चे हमें हमारे बचपन में खींच ले जाते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी यह सुन्दर रचना दिनांक 23.08.2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बच्चे सदैव हमें हमारे बचपन की याद दिलाते हैं...बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्या खूब बात कही. बच्चे अपना ही प्रतिबिम्ब होते हैं..

    उत्तर देंहटाएं
  5. आज की बुलेटिन जन्म दिवस : हरिशंकर परसाई …. ब्लॉग बुलेटिन में आपकी पोस्ट (रचना) को भी शामिल किया गया। सादर .... आभार।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज की बुलेटिन जन्म दिवस : हरिशंकर परसाई …. ब्लॉग बुलेटिन में आपकी पोस्ट (रचना) को भी शामिल किया गया। सादर .... आभार।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बच्चों के साथ रहने से ही बचपन लौट आता है, उम्र का कोई भी बंधन इस स्थिति को स्वीकार्य नही होता, सुंदर विचार.

    रामराम.

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} के शुभारंभ पर आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट को हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में शामिल किया गया है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {रविवार} (25-08-2013) को हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} पर की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा | सादर .... Lalit Chahar

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर रचना। बधाई। कभी यहाँ भी पधारें।
    सादर मदन
    http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं

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