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सोमवार, 26 अगस्त 2013

"भारत माँ आजाद हो गयी...!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 
अंग्रेजों के चंगुल से तो,
भारत माँ आजाद हो गयी!
लेकिन काले अंग्रेजों के,
जुल्मों से नाशाद हो गयी।।

आज वाटिका के माली के,
कपड़े उजले, दिल हैं काले,
मसल रहे भोले सुमनों को,
बनकर ये हाथी मतवाले,
आजादी की उत्कण्ठा अब,
कुण्ठा-पश्चाताप हो गयी।
भारत माँ आजाद हो गयी!!

तोड़ गुलामी की जंजीरे,
लालकिले पर ध्वज फहराया,
सोन चिरैया के हिस्से में,
संविधान परदेशी आया,
वीर सपूतों की कुर्बानी,
लगता है बरबाद हो गयी।
भारत माँ आजाद हो गयी!!

स्वप्न संजोए थे सिन्दूरी,
सब के सब रह गये अधूरे,
अब तो आशाएँ धूमिल हैं,
सपने कभी न होंगे पूरे,
जन-गण-मन गाते-गाते अब,
आजादी अभिशाप हो गयी।
भारत माँ आजाद हो गयी!!

11 टिप्‍पणियां:

  1. सच में आजादी के अर्थ ही बदल गए कद्र ही नहीं की गई ,अब पछताए होत क्या ,बहुत अच्छी रचना बधाई आपको|

    उत्तर देंहटाएं
  2. हरएक देशभक्त के मन में ऐसी ही भावनाएं आती हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - बुधवार- 28/08/2013 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः7 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ यथार्थ नामा।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ यथार्थ नामा। पूरी रचना अप्रतिम है भावों के उद्वेगों से संसिक्त है।

    आजादी की उत्कण्ठा अब,
    कुण्ठा-पश्चाताप हो गयी।
    भारत माँ आजाद हो गयी!!

    उत्तर देंहटाएं

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