"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 27 अगस्त 2013

"रासरचैया कहकर मत बदनाम करो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

योगिराज का सारे जग में, इतना मत अपमान करो।
कृष्णचन्द्र को रासरचैया, कहकर मत बदनाम करो।।

कर्म प्रधान बताया जिसने, गीता का शुभज्ञान दिया,
 भाई-बहन के पावन सम्बन्धों का जिसने मान किया,
मानवता के उस पालक का, जी भरकर गुणगान करो।

जिसने जीवनभर दुष्टों का, इस धरती पर हनन किया,
कर्तव्यों का बोध करा कर, मन में चिन्तन-मनन दिया,
मात-पिता, आचार्य-बुजुर्गों का, जीवन भर मान करो।

प्रहरी बनकर मातृभूमि की, रक्षा में सब सजग रहें,
अन्यायी-अत्याचारी की, बर्बरता को नहीं सहें,
जीव-आत्मा अजर-अमर है, मन में इतना ध्यान करो।

जिसने गौओं की सेवा कर, गोपालक पद पाया है,
शाकाहारी बनने का, गुरुमन्त्र हमें बतलाया है,
माखन-दुग्ध-दही को खाकर, तन-मन को बलवान करो।

योगिराज का सारे जग में इतना मत अपमान करो।
कृष्णचन्द्र को रासरचैया कहकर मत बदनाम करो।।

18 टिप्‍पणियां:

  1. सबको गीताज्ञान दिया है,
    जन जन को अभिमान दिया है

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुंदर सार्थक रचना के लिए गुरु जी बधाई
    आपकी यह रचना कल बुधवार (28-08-2013) को ब्लॉग प्रसारण : 99 पर लिंक की गई है कृपया पधारें.
    सादर
    सरिता भाटिया

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाकई ...आज के साधू तो बस तौबा हैं ...बदनामी भी ऐसी कि उफ़

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुंदर संदेश.

    जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  5. आज की बुलेटिन ऋषिकेश मुखर्जी और मुकेश .... ब्लॉग बुलेटिन में आपकी पोस्ट (रचना) को भी शामिल किया गया है। सादर .... आभार।।

    उत्तर देंहटाएं



  6. _/\_
    जयश्री कृष्ण !
    श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बधाइयां और शुभकामनाएं !
    ✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿✿



    उत्तर देंहटाएं
  7. एकदम वाजिब प्रश्न रखा है शास्त्री जी ने कि क्यों योगीराज श्रीकृष्ण को रास रचइया कह कर बदनाम किया जाता है। उत्तर आसान है क्योंकि आशाराम,ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय,डिवाईंन लाईट मिशन सरीखे संगठन विदेशियों से उत्प्रेरित होकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति को नष्ट करने हेतु कृत्रिम और काल्पनिक कथ्यों का सहारा लेकर यहाँ के पूर्वज महापुरुषों का चरित्र हनन करते हैं एवं जनता इन ढोंगियों/पोंगापंथियों को पूजती है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. उनक अपमान कौन कर सकता है ..??
    शुभकामनायें आपको !

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति..श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  10. खुबसूरत अभिवयक्ति......श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें......

    उत्तर देंहटाएं
  11. गीत , छंद , काव्य विधा वगैरह तो अपनी जगह उसके तो आप गुणी ही हैं , उठाया गया विषय बहुत ही महत्वपूर्ण एवं सार्थक है , जिस योगी राज ने सम्पूर्ण वेदांत के दर्शन को मानवता के हित के लिए रखा दिया उसे माखन चोर, रास रचैया के रूप में जानते है , १२ वर्ष की उम्र में कृष्ण ने वृन्दवान छोड़ दिया और फिर कभी वापस नहीं गए, उसी १२ वर्ष की उम्र के पहले, जब आज कंप्यूटर एवं टेलीविजन युग के बच्चे भी बच्चे ही रहते हैं उनके बारे में क्या क्या कहानिया गढ़ दी गयी . दर असल हमारा धर्म बीच के काल में मूर्खों , जाहिलों , अनपढों का धर्म रह गया . जिन्हें दर्शन , योग , धर्म , विद्या , वेदांत से कोई खास मतलब नहीं रह गया , उनके लिए किस्से कहानिया ही धर्म बन गए .

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails