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शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

" दोहे-धनतेरस" ( डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

धनतेरस के पर्व पर, सजे हुए बाज़ार।
घर में लाओ आज कुछ, नये-नये उपहार।।

झालर-दीपों से सजे, आज सभी के गेह।
मन के नभ से आज तो, बरसे मधुरिम नेह।।

रहे हमेशा देश में, उत्सव का माहौल।
मिष्ठानों का स्वाद ले, बोलो मीठे बोल।।

सरस्वती के साथ हों, लक्ष्मी और गणेश।
तब आएगी सम्पदा, सुधरेगा परिवेश।।

उल्लू बन जाना नहीं, पाकर द्रव्य अपार।
धन के साथ मिले सदा, मेधा का उपहार।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. उल्लू पहले से बने बनते नहीं दो बार :)

    सुंदर दोहे !

    उत्तर देंहटाएं
  2. सरस्वती के साथ हों, लक्ष्मी और गणेश।
    तब आएगी सम्पदा, सुधरेगा परिवेश।।
    सुन्दरतम भाव श्रृजन

    उत्तर देंहटाएं

  3. सरस्वती के साथ हों, लक्ष्मी और गणेश।
    तब आएगी सम्पदा, सुधरेगा परिवेश।।
    बहुत सुन्दर भाव.
    नई पोस्ट : दीप एक : रंग अनेक

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (02-11-2013) "दीवाली के दीप जले" चर्चामंच : चर्चा अंक - 1417” पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर सार्थक प्रस्तुति ....
    धनतेरस की हार्दिक शुभकामना!

    उत्तर देंहटाएं
  6. विलासिता की साधन स्वरूपा को सजाना मना है..,
    आज पूजा गृहाधार कर उसकी आरती गाना मना है.....

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर प्रस्तुति ,,,
    दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ एवं शुभकामनाएँ।।

    RECENT POST -: तुलसी बिन सून लगे अंगना

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर प्रस्तुति………

    काश
    जला पाती एक दीप ऐसा
    जो सबका विवेक हो जाता रौशन
    और
    सार्थकता पा जाता दीपोत्सव

    दीपपर्व सभी के लिये मंगलमय हो ……

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुंदर रचना.

    दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  10. सांस्कृतिक पक्ष को उजागर करते दोहे सुन्दर मनोहर।

    धनतेरस के पर्व पर, सजे हुए बाज़ार।
    घर में लाओ आज कुछ, नये-नये उपहार।

    उत्तर देंहटाएं

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