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गुरुवार, 7 नवंबर 2013

"दोहावली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 
जो मन में हो आपकेलिखो उसी पर लेख।
बिना छंद तुकबन्दियाँबन जाती आलेख।१।
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मन पंछी उन्मुक्त हैइसकी बात न मान।
जीवन एक यथार्थ हैइसको लेना जान।२।
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रवि की किरणें दे रहींजग को जीवन दान।
पाकर धवल प्रकाश कोमिल जाता गुण-ज्ञान।३।
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श्रीकृष्ण ने कर दियामाँ का ऊँचा भाल।
सेवा करके गाय कीकहलाये गोपाल।४।
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जीवन इक त्यौहार हैजानो इसका सार।
प्यार और मनुहार से, बाँटो कुछ उपहार।५।
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तम हरने के वास्तेखुद को रहा जलाय।
दीपक काली रात कोआलोकित कर जाय।६।
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अमर शहीदों का कभीमत करना अपमान।
किया इन्होंने देशहितअपना तन बलिदान।७।
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बिल्ले रखवाली करेंगूँगे राग सुनाय।
अब तो अपने देश मेंअन्धे राह बताय।८।
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सूखे रेगिस्तान मेंजल नहीं हासिल होय।
ख्वाबों के संसार मेंजीना दूभर होय।९।
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छात्र और शिक्षक जहाँकरते उलटे काज।
फिर कैसे बन पायेगाउन्नत देश-समाज।१०।
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गुलदस्ते में अमन केअमन हो गया गोल।
कौन हमारे चमन मेंछिड़क रहा विषघोल।११।

10 टिप्‍पणियां:


  1. खाली खाली अन कोष, भरा भरा दिखलाए ।
    तिनते राम बचाए जो, धरा खोद के खाए ।९५४।

    भावार्थ : -- देश का अन्न कोष रिक्त है और उसे भरा पूरा दिखा रहें है । ऐसे दुर्जनों से तो राम ही बचाए जो धरती खोद के खा रहे हैं ॥

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (08-11-2013) को "चर्चा मंचः अंक -1423" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर दोहावली-
    आभार गुरु जी-

    उत्तर देंहटाएं
  4. सार्थक सौद्देश्य दोहावली इसे सभी पूरा पढ़के लुत्फ़ उठाएं -

    जीवन के हर पक्ष को खंगालते दुलराते दोहे।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सार्थक संदेशात्मक दोहावली
    बधाई गुरुदेव

    उत्तर देंहटाएं

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