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रविवार, 17 नवंबर 2013

"शारदा नदी में स्नान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सिक्खों के प्रथम गुरू श्री नानक देव जी के
प्रकाश पर्व पर सभी देशवासियों को
लख-लख बधाइयाँ!
"गंगा-स्नान मेला"
आज कार्तिक पूर्णिमा का दिन है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का प्रचलन पौराणिक-काल से ही हमारे देश में चला आ रहा है। अतः परम्परा का निर्वहन करने के लिए हम भी "माँ पूर्णागिरि" के पद पखार रही शारदी नदी के किनारे जा पहुँचे। यह पावन स्थल था- "बूम"। जो उत्तराखण्ड के चम्पावत जिले में टनकपुर से 12 किमी दूर पहाड़ों के ठीक नीचे है। 
चित्र में दिखाई दे रहे पर्वत की चोटी पर सती-माता "माँ पूर्णागिरि" का निवास है और उसके ठीक नीचे पावन शारदा नदी की जल-धारा कल-कल निनाद करती हुई श्रद्धालुओं को पवित्र स्नान का निमन्त्रण दे रही है।
 यहाँ भगवान के प्रिय फल "बेल" के पेड़ों के मध्य हमलोगों ने भी दो-तीन बेड-शीट बिछा कर 
अपना आसन जमा दिया।
इसके बाद पावन जल में डुबकी लगाने के लिए पावन शारदा नदी की ओर प्रस्थान किया।
महिलाओं ने तीन पत्थरों का चूल्हा बनाया और 
खिचड़ी बनानी शुरू कर दी।
इसके बाद सबने बैठकर बड़े प्रेम से खिचड़ी खाई। 
इसके बाद हम लोगों ने खटीमा से 6 किमी. की दूरी पर स्थित
शारदा नहर की ओर प्रस्थान किया!
जहाँ पर गंगा स्नान का विशाल मेला लगता है,
जो 5 दिनों तक चलता है!
इण्टरनेट की गति ठीक न होने के कारण
चित्र अपलोड नहीं हो पा रहे हैं!
इसलिए कल इस पोस्ट का 
शेष भाग मनोहारी चित्रों के साथ प्रकाशित करूँगा!
क्रमशः  ...............

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रही आध्यात्मिक सैर चित्र भी ललचाते मनभावन तमाम।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर विवरण
    नमस्कार !
    आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [18.11.2013]
    चर्चामंच 1433 पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें |
    सादर
    सरिता भाटिया

    उत्तर देंहटाएं
  3. बधाई इस सुंदर यात्रा के लिए..

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया.....यूँ ही मनायें जीवन का आनंद....

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  5. yah sanskriti ki vah jhalak hai jis par samay kabhi gard nahi daal sakega, sundar!

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपके साथ हमने भी खिचड़ी का लुफ्त उठा लिया...

    उत्तर देंहटाएं

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